मनरेगा में गड़बडिय़ों की सीबीआई जांच के आदेश

  • मनरेगा में गड़बडिय़ों की सीबीआई जांच के आदेश
You Are HereNational
Friday, January 31, 2014-3:50 PM

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आज उत्तर प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) में हुए घोटाले के जांच के आदेश दिये। न्यायमूर्ति देवीप्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने जांच एजेंसी को दिये अपने आदेश में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में मनरेगा में हुए घोटाले की जांच करे। जांच के  लिए जनहित याचिका सचिदानन्द गुप्ता की ओर से दायर की गयी है। याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसी 14 जिलों में हुए घोटाले की जांच करें। केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने उत्तर सरकार शासन से मनरेगा में हुए घोटाले की सीबीआई से जांच कराने के लिए कई बार अनुरोध किया था लेकिन अखिलेश यादव सरकार ने इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की। सीबीआई उत्तर प्रदेश में हुए खाद्यान्न घोटाले और एनएचआरएम योजना में पहले से ही जांच कर रही है।

न्यायालय ने सोनभद्र, गोण्डा, बलरामपुर, महोबा और कुशीनगर सहित राज्य के 27 जिलों में मनरेगा में हुए घोटालों की जांच करने के आदेश दिये। मनरेगा की राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी परिषद और राज्य गुणवत्ता समिति ने 2009-10 में पाया था कि इस सिलसिले में उपरोक्त जिलों में  बहुत सी अनियमितताएं हुई हैं। मायावती सरकार ने इस सिलसिले में कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। राज्य सरकार को 2002 में मनरेगा की मद में पांच हजार करोड़ रुपये मिले थे जिसमें केन्द्र सरकार ने 90 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 प्रतिशत हिस्सा दिया था।

रमेश ने राज्य सरकार को मनरेगा में हुए घोटालों में जांच करने को कहा लेकिन राज्य सरकार ने अपने अधिकारियों के खिलाफ कोई लकार्रवाई करने की कोशिश नहीं की। रमेश ने बताया कि उन्होंने राज्या के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पांच पत्र लिखे जिसमें उन्होंने कहा कि मायावती सरकार ने मनरेगा योजना को ठीक से लागू नहीं किया और इसमें बहुत सी अनियमितताएं हुई और इस पर ठोस कार्रवाई करने का अनुरोध किया था लेकिन सरकार ने इस पर कोई रुचि नहीं दिखाई। इस सिलसिले में केन्द्रीय मंत्री ने इस योजना के तहत जारी धन को रोकने की धमकी दी लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया गया क्योंकि इससे मनरेगा के तहत लाभ पाने वाले बहुत से लोग वंचित रह जाते।
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You