पुलिस का दावा, सहयोगियों की गिरफ्तारी से नक्सली मदद पर पड़ा असर

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Friday, January 31, 2014-3:20 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए पुलिस ने दावा किया है कि इससे नक्सलियों को विभिन्न शहरों से मिलने वाली मदद पर असर पड़ा है तथा आंदोलन कमजोर हुआ है। राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकरियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ में पिछले दो हफ्ते में पुलिस को नक्सलियों के नौ मददगारों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। इन मददगारों में नक्सली नेता प्रभाकर का करीबी नीरज चोपड़ा और सुखनाथ नरेटी भी शामिल है। चोपड़ा और नरेटी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने नक्सलियों को दवा, हथियार और अन्य सामनों की आपूर्ति को बाधित करने में सफलता पाई है।

 

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों का दंडाकरण्य स्पेशल जोनल कमेटी काम करता है। क्षेत्र में बड़े नक्सली घटनाओं को अंजाम देने में इस कमेटी की बड़ी भूमिका होती है। इस कमेटी के सदस्य प्रभाकर का नाम बड़े नक्सली नेताओं में शामिल है। प्रभाकर की जिम्मेदारी नक्सलियों के लिए विभिन्न सामानों की आपूर्ति करना है। उन्होंने बताया कि प्रभाकर ने बस्तर क्षेत्र में अपना प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए यहां के कुछ व्यापारियों के माध्यम से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी को दवा, हथियार और पैसा आपूर्ति करने का कार्य शुरू किया है।

 

रायपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार नक्सलियों से पूछताछ के दौरान जानकारी मिली है कि व्यापारी नीरज चोपड़ा और सुरखनाथ नरेटी प्रभाकर के करीबी रहे हैं तथा नक्सलियों के लिए विभिन्न सामनों की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चोपड़ा का मुख्य कार्य राज्य के शहरी क्षेत्रों से नक्सलियों के लिए दवाई, हथियार और पैसे की आपूर्ति करना है। साथ ही साथ शहरों में बीमार नक्सलियों का ईलाज कराने, उन्होंने कानूनी मदद मुहैया कराने और उनके रहने के लिए ठिकानों की व्यवस्था करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

 

उन्होंने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि प्रभाकर शीर्ष माओवादी नेता गणपति का रिश्तेदार है तथा यही कारण है कि माओवादियों में उसकी भूमिका हाल में ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किए गुड्सा उसेंडी के बराबर महत्वपूर्ण है। अधिकरियों ने बताया कि गिरफ्तार नक्सलियों से पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि नक्सलियों के लिए पैसों का इंतजाम भी चोपड़ा और नरेटी करते थे।

 

इसके लिए क्षेत्र में काम करने वाले तेंदूपत्ता और विभिन्न कार्यों में लगे ठेकेदारों तथा विभिन्न उद्योगपतियों को डराया धमकाया जाता था। इस दौरान यह भी जानकारी मिली है कि कई उद्योग घरानों से चोपड़ा और नरेटी ने नक्सलियों के लिए पैसा वसूला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक पकड़े गए नक्सली सहयोगियों से जानकारी मिली है कि ज्यादातर मामलों में उन्होंने राजधानी रायपुर से विभिन्न सामान नक्सलियों को आपूर्ति किया है। जबकि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़-उड़ीसा सीमा पर स्थित गरियाबंद की ओर से भी नक्सलियों को सामान आपूर्ति किया जाता है।

 

पुलिस इस क्षेत्र में नजर रखी हुई है। राजधानी रायपुर की पुलिस ने पिछले दो हफ्ते में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के निवासी नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार नक्सली सहयोगियों पर नक्सलियों के लिए दवाई, हथियार और पैसा पहुंचाने का आरोप है वहीं इन पर बस्तर क्षेत्र के महत्वपूर्ण रावघाट परियोजना को भी नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रचने का भी आरोप है।


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