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न्यायमूर्ति गांगुली के इस्तीफे के लिए आयोग ने पीठ थपथपाई

  • न्यायमूर्ति गांगुली के इस्तीफे के लिए आयोग ने पीठ थपथपाई
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Friday, January 31, 2014-4:36 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्रशिक्षु विधि छात्र के यौन उत्पीडऩ़ के मामले में फंसे पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गांगुली के मामले को लेकर दिए गए इस्तीफे का श्रेय लेते हुए अपनी पीठ थपथपाई है। आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने आज आयोग के 21वें स्थापना दिवस पर अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गांगुली का इस्तीफा आयोग की प्रमुख उपलब्धि है।

शर्मा का कहना था कि आयोग के दबाव के कारण ही यौन उत्पीडऩ़ के आरोपी न्यायमूर्ति गांगुली को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पडा। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में आयोग ने ओडिशा, मध्यप्रदेश और हरियाणा के कुछ अहम मामले सुलझाए। आयोग की अध्यक्ष ने इस मौके पर वर्ष 2011से 2014 के बीच आयोग की उपलब्धियों के ब्यौरे वाली एक पुस्तिका का विमोचन भी किया।

पुस्तिका के अनुसार विदेशों में शादी करने वाली लडकियों को उत्पीडऩ़ से बचाने की कोशिश के तहत भारतीय मूल के विदेशी दूल्हों का बैरा रिकार्ड पर लाने के लिए आयोग ने गुजरात सरकार को विवाह पंजीकरण फार्म में बदलाव लाने पर मजबूर किया। पूर्वोत्तर क्षेत्र पर खास ध्यान देते हुए आयोग पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ का गठन किया गया। कई राष्ट्रीय विमर्श आयोजित करके मेडिकल गर्भपात कानून 1971 की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग कानून 1990 की समीक्षा करके इसे स्वतंत्र तथा और मजबूत बनाने के लिए सिफारिशें भी की गई।

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