क्या 16 फरवरी को सरकार चलाने की नैतिक ताकत खो देंगे केजरीवाल?

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Friday, January 31, 2014-6:24 PM

नई दिल्ली: दिल्ली मे आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के नैतिक रूप से गिरने का वक्त लगभग तय लग रहा है। दिल्ली सरकार ने विधानसभा के अगले सत्र के लिए 13 से 16 फरवरी तक का समय निश्चित किया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आप से निकाले गए विनोद कुमार बिन्नी,जदयू के विधायक शोएब इकबाल और कांग्रेस के विधायक असिफ मोहम्मद खान के विरोध के बीच दिल्ली सरकार कैसे विधानसभा मे अपना जनलोकपाल बिल पास करवाएगी।

70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी को 28 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और कांग्रेस के 8 विधायकों के समर्थन और जद(यू) के विधायक शोएब इकबाल के समर्थन से केजरीवाल ने विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया था। केजरीवाल सरकार के विधानसभा में बहुमत  हासिल करने के मात्र एक महीने बाद ही सरकार के प्रति नारजगी भी बढ़़ रही है। आम आदमी पार्टी के अपने ही विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने जब पार्टी से बगावत की तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस बीच विधायक शोएब इकबाल भी सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए विधानसभा में समर्थन न देने की बात कह चुके हैं। गुरुवार को कांग्रेस के विधायक असिफ मोहम्मद खान ने भी यह कहकर सबको सकते में डाल दिया कि वह विधानसभा में केजरीवाल का समर्थन नहीं करेंगे भले ही पार्टी इस कदम के लिए उन्हें सजा दे दे। ऐसे में 70 विधायकों वाली दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल के पास अब महज 34 विधायकों का ही समर्थन बचा है। 16 फरवरी को जब विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश होगा तो उस समय सबकी नजर दिल्ली विधानसभा पर लगी रहेगी।

वहीं कांग्रेस ने अभी तक न तो केजरीवाल सरकार से समर्थन वापस लेने की बात कही है और न ही सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे अपने विधायक आसिफ मोहम्मद खान से पार्टी स्टेंड के विरोध में बयान बाजी करने के लिए सफाई मांगी है। हालां कि अगले 6 महीने तक केजरीवाल सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं आ सकता लेकिन 16 फरवरी को केजरीवाल सरकार का बिल यदि विधानसभा में पास न हो पाया तो केजरीवाल सरकार में रहने की नैतिक ताकत को खो देंगे।


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