सिखों का राहुल को परसों तक का अल्टीमेटम

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Saturday, February 01, 2014-12:33 AM

 नई दिल्ली : 1984 सिख दंगों के मसले पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कबूलनामे से मचा राजनीतिक तूफान थमता नहीं दिख रहा है। भड़के सिख संगठनों ने अब 1984 के दोषियों के नाम उजागर करने पर अड़ गए हैं।

यही कारण है कि लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी सिखों का पारा सातवें आसमान पर रहा। सिखों ने राहुल गांधी एवं कांग्रेस पार्टी पर हमला बोलते हुए 72 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया। साथ ही चेतावनी दी कि कांग्रेस दोषियों के नाम बताएं, अन्यथा सिख संगठन राहुल गांधी का घेराव के साथ बड़ा आंदोलन शुरू कर देंगे। 

इसके अलावा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एस.आई.टी. की मांग को लेकर बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगी।  शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रदेश अध्यक्ष एवं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन मंजीत सिंह जी.के. ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से मांग करेंगे कि सिख दंगों की जांच के लिए उनकी निगरानी में एस.आई.टी. बने।

उन्हें केंद्र सरकार एवं दिल्ली सरकार द्वारा गठित एस.आई.टी. पर भरोसा नहीं है। इस मामले में वर्तमान में जो केस अदालतों में विचाराधीन है, उसकी समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए। इसके लिए 60 दिन और 90 दिन की समय सीमा सुनिश्चित हो। मंजीत सिंह जी.के. ने कहा कि 10,817 घरों को नुक्सान हुआ, लेकिन एफ.आई.आर. सिर्फ 500 के आसपास हुई। 

ज्ञानी जैल सिंह के पूर्व प्रेस सचिव त्रिलोचन सिंह के हवाले से आ रही खबरों का जिक्र करते हुए मंजीत सिंह जी.के.ने सवाल पूछा कि दिल्ली छावनी में 5,000 सैनिकों की मौजूदगी होने के बावजूद 1984 में कांग्रेस द्वारा 3 दिन के बाद सेना को मेरठ से इस कत्लेआम को रोकने के लिए क्यों बुलाया गया था?

तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह (जो कि तीनों सैनाओं के प्रमुख थे) द्वारा राजीव गांधी से टेलीफोन पर 2 दिन तक संपर्क ना होने का उदाहरण देते हुए उन्होंने इस कत्लेआम को कांग्रेस प्रयोजित एवं पूर्वनियोजित कत्लेआम करार दिया। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के रविंदर सिंह खुराना, अवतार सिंह हित, ओंकार सिंह थापर, कुलदीप सिंह भोगल, हरमनजीत सिंह, भुपिंदर सिंह आंनद, गुरमिंदर सिंह मठारू, विधायक जतिंदर सिंह शंटी, कमेटी सदस्य गुरमीत सिंह लुबाणा, परमजीत सिंह चंढोक, जीत ंसिंह, हरजिंदर सिंह थे।


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