बारात, लंगर में भी लागू होगा फूड सेफ्टी बिल

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Saturday, February 01, 2014-2:47 PM

नई दिल्ली: केंद्र सरकार फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के दायरे को बढ़ाने जा रही है। आगामी 4 फरवरी से शादी विवाह से लेकर मंदिर, वीरवारों और सामाजिक कार्यक्रमों में परोसा जाने वाला खाना इसके दायरे में होगा। हर हालात में 4 तारीख तक इन्हें अपना पंजीकरण कराना और लाइसैंस लेना है और यदि कोई संगठन या किसी कार्यक्रम में इस एक्ट का उल्लंघन होता है तो 5 लाख का जुर्माना और 6 महीने की कारावास की सजा का प्रावधान है।

व्यापारी संगठनों में भय का माहौल : इस नियम के अनिवार्य होने के कारण देशभर के व्यापारियों में बेहद भय और बेचैनी फैली है क्योंकि व्यापारियों का कहना है कि उक्त कानून के प्रावधान अत्यंत अव्यवहारिक और भारत के खाद्य व्यापार की जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और उनका पालन करना बेहद असम्भव है। यह कानून केवल व्यापारियों पर ही नहीं बल्कि हर उस जगह लागू होगें जहां भी खाद्य वस्तुएं लाभ अथवा बिना लाभ के बिकती या वितरित होती हैं। सभी संगठन इस कानून को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं।

इस कानून को स्थगित रखने और इस कानून एवं इसके नियम तथा उप नियमों पर पुनर्विचार करने की मांग को लेकर कांफैडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का एक प्रतिनिधिमंडल बीते 14 जनवरी को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से मिला था। कैट के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में आजाद ने इसकी गम्भीरता को समझते हुए कैट की दोनों मांगे स्वीकार करने का भरोसा दिया था लेकिन अब जबकि पंजीकरण की आखिरी तारीख 4 फरवरी बिल्कुल नजदीक आ गई है और अभी तक कानून को स्थगित करने की कोई अधिसूचना नहीं निकाली गई है। इस कारण देशभर के व्यापारी बेहद सकते में हैं क्योंकि बिना पंजीकरण के व्यापार करने पर 5 लाख का जुर्माना और 6 महीने का कारावास हो सकता है।

परेशान कैट के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल से भी मुलाकात की, जहां सिब्बल ने उन्हें बताया की उन्होंने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से विस्तृत चर्चा की है और आजाद का भी यह मानना है कि इस कानून के अनेक प्रावधानों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। सिब्बल ने बताया की कैट द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी और जल्द ही सरकार द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

कैट के ही आग्रह पर लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और संसद की पब्लिक एकाऊंट्स कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने भी आजाद को पत्र लिखकर कैट की मांगों का समर्थन करते हुए इस कानून को स्थगित रखने का आग्रह किया था लेकिन नतीजा ढाक के 3 पात वाली निकली और अब सभी की धड़कनें तेज हैं।

फूड एक्ट में शामिल संस्थाएं
मंदिर, गुरुद्वारा, शादी-ब्याह, सड़क पर लगने वाले ठेले, ट्रांसपोर्ट, महिला उद्योग, कुटीर उद्योग, हाकर्स, सामाजिक आयोजन, कांफ्रैंस, सैमिनार, जागरण और यहां तक कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मिड-डे मील स्कीम भी शामिल है।


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