बुंदेलखंड में बसपा को महिलाओं से परहेज!

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Saturday, February 01, 2014-4:03 PM

बांदा: लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती भले ही महिला हों, लेकिन उनकी पार्टी के बुंदेली नेता जिम्मेदारी सौंपने के मामले में महिलाओं से परहेज कर रहे हैं। चित्रकूटधाम परिक्षेत्र में हाल ही में घोषित पदाधिकारियों की सूची से यही साबित हो रहा है। इसमें एक भी महिला को तरजीह नहीं दी गई है।

बसपा प्रमुख मायावती ने खुद महिला होने के बावजूद महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में आगे लाने का अब तक कोई प्रयास नहीं किया है और किसी नेता में उनके विचारों की मुखालफत करने की हिम्मत भी नहीं है। शायद यही वजह है कि बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम परिक्षेत्र में आने वाले बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर की जारी पदाधिकारियों की सूची में एक भी महिला का नाम नहीं है।

यह सूची पार्टी के महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा विधायक दल के उपनेता गयाचरण दिनकर ने जारी की है। सर्वजन समाज की बात करने वाली बसपा की इस सूची में ज्यादातर अनुसूचित वर्ग के विशेष कौम के लोगों को तरजीह दी गई है, अन्य वर्गों के लोगों को मामूली पदों में रखकर झुनझुना थमा दिया गया है।

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी और विधायक गयाचरण दिनकर ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के चारों जिलों में नई जिला इकाइयों का गठन किया। इनमें पहले से काबिज सभी जिलाध्यक्षों को बहाल रखा गया है। इसके पांच समन्वयकों सहित 78 पदाधिकारी बनाए गए हैं, लेकिन इनमें एक भी महिला शामिल नहीं है।

बांदा में बलदेव वर्मा, चित्रकूट में रामलखन निषाद, महोबा में अशोक बौद्ध और हमीरपुर में निशात नबी पुन: जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। इन जिलाध्यक्षों पर नकेल कसने के लिए अनुसूचित वर्ग की कौम से विशेष समन्वयकों या प्रभारियों को नियुक्त किया गया है। किसी भी इकाई में एक भी महिला शामिल नहीं है।

चार जनपदों में महिलाओं को पार्टी संगठन में न शामिल करने के सवाल पर उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बसपा विधायक दल के उपनेता और बांदा जिले की नरैनी विधानसभा सीट से विधायक गयाचरण दिनकर ने बेतुका-सा जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘‘बहुजन समाज की महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं है और अन्य वर्ग की महिलाओं से बसपा को कोई फायदा होने वाला नहीं है, इसलिए ऐसा किया गया है।’’

दिनकर के इस तर्क से बसपा के खेमे से बांदा की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकीं आईएएस अधिकारी राजकरन वर्मा की पत्नी किरन वर्मा बेहद नाराज हैं, उनका आरोप है कि यहां के बसपा नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए महिलाओं को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘महिलाओं से इतनी ही नफरत है तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी को विधान परिषद में क्यों पहुंचाया?’’ ऐसे में यह कहना गलत न होगा कि पार्टी की मुखिया के महिला होने के बाद भी बुंदेलखंड में बसपा को महिलाओं से परहेज है।
                        


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