उप्र: भाजपा को भारी पड़ सकती है वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा

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Sunday, February 02, 2014-8:24 AM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के रास्ते दिल्ली की कुर्सी हासिल करने का सपना देख रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उत्तर प्रदेश में अपने वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा भारी पड़ सकती है। राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी अमित शाह द्वारा तेजी से अन्य दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के अभियान से चुनावी तैयारी में लगे पार्टी नेताओं की बेचैनी काफी बढ़ गई है। वैसे भी जब से अमित शाह यूपी के प्रभारी और लक्ष्मीकांत बाजपेयी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हुए हैं तब से बहुत सारे नेता हाशिए पर डाल दिए गए हैं।

ऐसे नेताओं में राष्ट्रीय महासचिव वरुण गांधी, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र, पूर्व महामंत्री व राज्यसभा सांसद विनय कटियार, पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीराम चैहान, पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केसरीनाथ त्रिपाठी, पूर्व प्रदेश महामंत्री विंध्वासिनी कुमार, पूर्व महामंत्री व विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, पूर्व महामंत्री श्याम नंदन सिंह, केशव मेहरा, महेंद्र पांडेय के अलावा प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी, ब्रजेश शर्मा, रमापति शास्त्री शामिल हैं।

ऐसे नेताओं में से अधिकतर नेता अति पिछड़ा वर्ग व दलित समुदाय से आते हैं। ये नेता वर्तमान नेतृत्व से न सिर्फ उपेक्षित हैं, बल्कि काम की तलाश में खाली बैठे हैं। उधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि यह हकीकत सबको स्वीकार करनी पड़ेगी कि भाजपा उत्तर प्रदेश में चैथे नंबर की पार्टी है और लोकसभा में उसके पास यूपी से मात्र दस सांसद हैं। यदि इस संख्या को पांच छह गुना बढ़ाना है तो हमे पार्टी का कुनबा बड़ा करना होगा।


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