चम्बल के पानी में अब कोई उबाल नहीं!

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Sunday, February 02, 2014-1:05 PM
धौलपुर: चंबल के बीहड़ काफी समय से शांत हैं वहां अब घोडों की टाप और डाकुओं की रौबदार आवाज सुनाई नहीं देती। जिले में इनामी बदमाशों की सूची में 82 बदमाशों के नाम है जिनमें से ऐसा एक भी ऐसा नहीं है जिसे डकैत माना जाए। इसमें डकैत सरगना जगन के दो भाईयों पर जरर राजस्थान के साथ सीमावर्ती राज्यों की पुलिस से इनाम घोषित हैं मगर ये भी पुलिस के डर से छिपे बैठे हैं।

पुरातन काल से चंबल नदी बह रही है जिसे आजादी से पहले कुछ डकैतों ने बीहड़ क्षेत्र बना दिया। आजादी से पूर्व कई डकैतों ने अंग्रेज सरकार को नाकों चने चबवा दिए थे। तभी से डकैतों ने अपने को बागी कहना शुरु कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि वे अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए काम कर रहे हैं। समय के साथ चंबल नदी नहीं बदली और न ही डकैत बदले। केवल डकैतों के चेहरे बदलते रहे। कभी डकैत सुलताना,बढई के कारनामों से चंबल के  बीहड गूंजते रहे तो बाद में ये नाम मानसिंह तो कभी पुतलीबाई हो गए।

इसके बाद मोहर सिंह, फूलनदेवी,गोपाली, पान सिंह, तौमर,जगजीवन परिहार तक आ गए। कुछ समय पहले जिले के हालात ऐसे बन गए थे कि यहां दस्यु उन्मूलन के लिए अतिरिक्त अधीक्षक लगाना पड़ा तथा बीहड़ क्षेत्र में पुलिस चौकियां खोलनी पड़ी। मगर बदलाव की बयार ऐसी बही कि डकैत तथा डकैती इतिहास बनती जा रही है। जिला पुलिस के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2011 में जिले में डकैती की एक भी वारदात नहीं हुई है जबकि 2012 में मात्र एक वारदात डकैती की हुई है।

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