केजरीवाल भटके भी और फंसे भी

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Sunday, February 02, 2014-2:02 PM

नई दिल्ली (अकु श्रीवास्तव): भ्रष्टाचारी राजनीतिज्ञों का नाम लेकर आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल फंस और भटक दोनों गए हैं। शुक्रवार को आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कार्यकत्र्ताओं के बीच जब उन्होंने भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के नाम घोषित करना शुरू किया तो लगा कुछ खास होगा, लेकिन लिस्ट बढ़ती गई और साथ ही दिशा भी खोती गई।

भ्रष्ट नेताओं में सुरेश कलमाडी और नितिन गडकरी के नाम की घोषणा के बाद उत्सुकता बढ़ी लेकिन फिर बाद में सब धान बाइस पसेरी। राहुल गांधी, कपिल सिब्बल, अनंत कुमार समेत कई नेता भ्रष्टाचार को लेकर कभी कोर्ट में नहीं बुलाए गए। शाम तक विरोध शुरू हुआ, नितिन गडकरी ने नोटिस भेज दी। अनंत कुमार और कपिल सिब्बल ने भी चुनौती दे दी। सुप्रीम कोर्ट के वकील रहे सिब्बल ने तो 2 दिन में भ्रष्ट साबित करने को कहा नहीं तो नतीजा भुगतने की चेतावनी दी।

कार्यकारिणी की भीड़ के साथ केजरीवाल भी बहे और मुलायम सिंह यादव, मायावती, सुशील कुमार शिंदे समेत 20 लोगों को भ्रष्ट की श्रेणी में ला दिया। दूसरे दिन इसमें कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और बी.जे.पी. के पी.एम. पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी को भी जोड़ दिया। 20 लोगों की लिस्ट में सिर्फ भ्रष्ट ढूंढना मुश्किल था तो फिर उस लिस्ट का नाम राजनीतिक रूप से बड़ा किया गया। आप प्रवक्ता गोपाल राय बचाव में सामने आए और कहा कि भ्रष्ट तत्वों, आपराधिक छवि व वंशवादी नेताओं की लिस्ट है। दावा किया-भ्रष्टाचार इन्हीं से पनपता है।

राजनीतिक हलकों में सवाल उठा-केजरीवाल को यह हक किसने दिया। भाजपा ने उनको नादान करार दिया और ज्यादातर जगह कहा गया कि प्रमाणित कैसे करेंगे कि ये भ्रष्ट हैं। आधे से ज्यादा पर इसके पहले करप्ट का फतवा नहीं रहा है। सोनिया और मोदी पर जो भी आरोप हों, उन पर बहस हो सकती है। विस्तारित सूची की श्रेणी जब बढ़ाई गई तो उसमें परिवारवाद को भी जोड़ा गया और कहा गया कि वंशवाद को बढ़ाना भी भ्रष्टाचार है।

वंशवाद को लेकर बहस होती रही है और अभी तक उसपर कोई कानूनी सहमति नहीं बन सकी है। तर्क दिए गए कि छवि चमकाने के नाम पर जिन नेताओं पर खर्चा किया जा रहा है, उसकी भरपाई व्यापारी नफा लेकर ही करेंगे। ये तर्क भी सिक्के का दूसरा पहलू था।अब तो कानूनन भी पार्टियों/नेताओं को पैसा दिया जाता है।

545 लोकसभा सीटों से चुनकर आए 162 सांसद आपराधिक भ्रष्ट  छवि के बताए जाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर इसी लिस्ट या इसी वर्ग पर उनका हमला होता तो शायद इतना विरोध नहीं होता। वंशवाद वाले नेताओं को जोड़कर उन्होंने लिस्ट भी हल्की कर दी और भटक भी गए। कहीं ऐसा न हो कि दिग्विजय की टिप्पणी -न खाता न बही, जो केजरीवाल कहें वो सही-ही ज्यादातर लोग कहने लगें।

संसद में 28.6 फीसदी लोग वंशवाद से
लोकसभा के 545 सदस्यों को यूं तो 8-9 श्रेणियों में बांटा गया है लेकिन मोटे तौर पर 5 श्रेणियां मानी जाती रही हैं। एक-बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि के, 2-छात्र राजनीति से,  3-व्यवसाय से, 4- पारिवारिक पृष्ठभूमि से और 5-अन्य। सबसे बड़ा तबका 46.8 फीसदी बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि का है और 28.6 फीसदी लोग पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के हैं।

विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या वाले सभी सांसद भ्रष्ट हैं! देश के सभी बड़े नेताओं के बाद उनके परिवार से कोई न कोई राजनीति में है। इस बात की क्या गारंटी है कि अरविंद केजरीवाल के परिवार में कोई और राजनीति में नहीं आएगा। नैतिकता पर बहस हो सकती है, पर अभी कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।


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