...और रब ने बना दी भारती-जितेंद्र की जोड़ी

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Sunday, February 02, 2014-3:27 PM

रायपुर: कहा जाता है कि पति-पत्नी की जोड़ी ऊपर वाला बनाता है और उनका मिलन धरती पर होता है। जितेंद्र बत्रा और उन्हीं के कद की भारती यादव पर यह उक्ति बिल्कुल सटीक बैठती है। छत्तीसगढ़ के इस्पात नगरी भिलाई में ‘तीन फीट तीन इंच’ के जितेंद्र को आखिरकार तीन फीट की जीवन संगिनी मिल ही गई। इस अंतर्जातीय विवाह के लिए दोनों के परिजनों के बीच सहमति बनी और ये दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी जितेंद्र 34 साल के और कद में तीन फीट तीन इंच के हैं।

 

होशंगाबाद की भारती 31 साल की हैं और उनका कद तीन फीट है। दोनों को जीवनभर साथ निभाने वाले अच्छे हमसफर की तलाश थी। आखिरकार दोनों को एक-दूजे का सहारा मिल ही गया। जितेंद्र स्वर्गीय आलम चंद बत्रा के सुपुत्र हैं। उत्तर गंगोत्री सुपेला के होजियरी मार्केट में उनकी कपड़े की दुकान है। वहीं, भारती मध्यप्रदेश के होशंगाबाद के ग्वालटोली में रहने वाले शंकरलाल यादव की सुपुत्री हैं। जितेंद्र चार साल पहले रक्षाबंधन पर होशंगाबाद अपनी मौसी के घर गए थे और वहीं उन्होंने भारती को देखा था। भारती उनकी मौसेरी बहन पूजा तलरेजा की सहेली है। घर पर उनका आना-जाना था।

 

तब से उन्होंने भारती को अपनी जीवन संगिनी बनाने का सपना संजोए रखा था। सामाजिक बंधनों के चलते चाहकर भी वे अपने दिल की बात परिवार वालों से नहीं कह पा रहे थे। आखिर में रहा नहीं गया। जितेंद्र ने चाचा दया राम बत्रा और बड़े भैया पवन को भारती के बारे में बताया। बत्रा परिवार ने समाज के गणमान्य लोगों से सलाह मशविरा किया। इसके बाद जितेंद्र के लिए रिश्ते की बात करने भारती के घर गए। भारती के पिता शंकरलाल यादव बताते हैं कि दूसरे समाज से रिश्ते आने को वे भी एकाएक स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।

 

एक तरफ अंतर्जातीय विवाह के कारण सामाजिक परिस्थितियां तो दूसरी तरफ उनकी बेटी का भविष्य था। अंतत: अपनी बेटी की खुशी के लिए उन्होंने जितेंद्र के साथ रिश्ता तय करने का फैसला किया। यह बात अपने परिवार के समक्ष रखी और सभी ने उनका साथ भी दिया। आखिरकार गत शुक्रवार को सुंदर नगर गुरुद्वारा में दोनों की धूमधाम से शादी हुई।

 

दोनों परिवार के रिश्तेदार और मित्र बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने पहुंचे। एक-दूसरे का साथ पाकर भारती और जितेंद्र बेहद खुश हैं।  नवविवाहित जितेंद्र कहते हैं, ‘‘छोटे कद को लेकर मेरे मन में कभी भी कोई कसक नहीं रही है। मुझे पूरा भरोसा था कि रब ने जैसा मुझे बनाकर यहां भेजा है तो मेरे लिए एक दुल्हन भी बनाई होगी।’’ भारती भी इसे ईश्वर की मदद मानती हैं।


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