मप्र में बत्तीधारियों को खाकी की दरकार

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Sunday, February 02, 2014-4:01 PM

भोपाल: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद कई नेताओं का कद बढ़ गया है और वे अब लालबत्ती वाले वाहनों में चलने लगे हैं मगर खाकी की सुरक्षा उन्हें नसीब नहीं हो सकी है। यह दर्द इन नेताओं में नजर भी आ रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने तो अपना दर्द सरेआम बयां कर सरकारी वाहन तक लौटा दिया है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की है और पिछले चुनाव के मुकाबले उसे सीटें भी ज्यादा मिली हैं।

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बार कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी है। पद की शपथ लेते ही मंत्रियों को लालबत्ती वाला वाहन तो मिल गया था, मगर कई मंत्री ऐसे हैं, जिन्हें सुरक्षा बल नहीं मिल सका है। राजनीति में नेता का कद उसके वाहन और मिली सुरक्षा से तय होता है, यही कारण है कि कई मंत्री जिन्हें अभी तक सुरक्षा नहीं मिली है वे प्रशासनिक अमले के बर्ताव से खुश नहीं हैं। राज्य सरकार में नए मंत्री के तौर पर माया सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, रामपाल सिंह, दीपक जोशी, सुरेंद्र पटवा, कुसुम महदेले, ज्ञान सिंह ने स्थान पाया है, मगर इनमें से कई को अभी तक वाई श्रेणी की सुरक्षा नहीं मिल पाई है।

 

अधिकांश नए मंत्रियों के आवास पर सुरक्षा बलों की तैनाती भी नहीं हुई है। इतना ही नहीं कई मंत्रियों के भोपाल के बाहर के प्रवास के दौरान पर्याप्त सुरक्षा बल भी नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि मंत्री सरकार के अंग हैं, लिहाजा वे चाहकर भी अपनी बात को जाहिर नहीं कर पा रहे हैं, मगर पिछले वर्षों में कई मंत्रियों के साथ हुए हादसे उन्हें चिंतित किए हुए है।

 

सरकार की ओर से लाल बत्ती वाले वाहनों में चल रहे नेताओं की सुरक्षा में बरती जा रही ढिलाई को मंत्रियों ने भले ही जाहिर न किया हो मगर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने सामने ला दिया है। उनका कहना है कि सरकार व प्रशासनिक अमला लगातार उपेक्षा बरत रहा है। उन्हें अब तक सुरक्षा नहीं मिली है और न ही उनकी मांग के मुताबिक सरकारी अमला मुहैया कराया गया है। कटारे ने सिर्फ बयानबाजी ही नहीं की है, बल्कि विरोध स्वरूप सरकार की ओर से दिए गए वाहन को भी लौटा दिया है।

 

उनका कहना है कि एक तरफ  सरकार सहयोगात्मक रुख की बात करती है, दूसरी ओर विपक्ष के साथ असहयोगात्मक रवैया अपनाए हुए है। वहीं राज्य सरकार के गृह मंत्री बाबूलाल गौर का कहना है कि मंत्रियों को जल्दी ही सुरक्षा मुहैया करा दी जाएगी। देरी क्यों हो रही है, इसका स्पष्ट तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। राज्य में सरकार के गठन को एक माह से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी मंंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष को सुरक्षा कवच का न मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना है कि नेता प्रतिपक्ष के बागी तेवरों का सरकार पर कितना असर होता है।


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