राजनीतिक दलों के लिए खोखले सपने बेचना संभव नहीं होगा

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Sunday, February 02, 2014-6:50 PM
नई दिल्ली :  चुनाव आयोग की चली तो राजनीतिक दलों के लिए खोखले सपने बेचना संभव नहीं होगा। बड़े चुनावी वादे करने से पहले दलों को अपने घोषणापत्र मे ही यह भी बताना होगा कि इसके लिए संसाधन कैसे और कहां से जुटाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को घोषणापत्र के लिए दिशानिर्देश बनाने को कहा था। 
 
आशय तो मतदाताओं को मुफ्त उपहार बांटने पर रोक लगाने का था, लेकिन अब उसका दायरा बढ़ाया जा सकता है। शुक्रवार को आयोग ने सभी दलों को एक मसौदा भेजा है, जिसमें आशा जताई गई है कि चुनावी वादे वित्ताीय आधार पर भी दुरुस्त होने चाहिए। अगर सभी दल सहमत हुए तो घोषणापत्र में यह भी बताना पड़ सकता है कि उसके लिए संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे, ताकि मतदाता उस योजना या वादों को लेकर ठोस निर्णय ले सकें।
 
भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी की मंशा, तो अरविंद केजरीवाल की सस्ती बिजली और ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे वादों पर आयोग सवाल पूछ सकता है। घोषणापत्र दिशानिर्देश के लिए आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को मसौदा भेजकर 7 फरवरी तक जवाब मांगा है।मसौदे में आयोग ने कहा है कि कल्याणकारी योजना का वादा तो किया जा सकता है, लेकिन ऐसा कोई वादा नहीं किया जाना चाहिए जिससे चुनाव का वातावरण दूषित हो और मतदाता प्रभावित हों।
 

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