उम्मीद है राष्ट्रपति तेलंगाना पर विधायकों के विचार पर ध्यान देंगे: किरण

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Monday, February 03, 2014-3:12 AM

हैदराबाद: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2013 को राज्य विधानमंडल द्वारा खारिज किये जाने को ‘‘ब्रह्मास्त्र’’ बताते हुए आज विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी विधेयक को संसद को भेजने से पहले इसे ध्यान में रखेंगे।

रेड्डी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति विधानसभा और विधानपरिषद के :विधेयक संबंधी: मत पर ध्यान देंगे। मत जिस पर सवाल नहीं खड़ा किया गया और जिसे चुनौती नहीं दी गई है। यह मत है कि राज्य अखंड रहना चाहिए। देखते हैं कि क्या होता है।’’

उन्होंने तेलंगाना के नेताओं की इस आलोचना को खारिज कर दिया कि विधानसभा में विधेयक पर ध्वनि मत से निर्णय बेकार है। उन्होंने कहा, ‘‘ध्वनि मत का मतलब होता है निर्विवाद और निर्विरोध।’’

उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद और विधानसभा में 80 से 90 प्रतिशत विधेयकों को ध्वनिमत से पारित किया जाता है। उन्होंने कहा कि हाल में लोकपाल विधेयक, खाद्य सुरक्षा विधेयक और यहां तक कि झारखंड, छत्तीसगढ़ गठन विधेयकों को भी ध्वनिमत से ही पारित किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा में प्रस्ताव खारिज होने के बाद भारत में किसी भी राज्य का गठन नहीं हुआ है। यह प्रस्ताव राज्य को अखंड रखने के लिए ब्रह्मास्त्र है।’’ उन्होंने कहा कि राज्य को अखंड रखने के बारे में राष्ट्रपति से चार या पांच फरवरी का समय मांगा है।


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