निजी दूरसंचार कंपनियों की आडिट के मामले में न्यायालय ने सरकार व कैग से मांगा जवाब

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Monday, February 03, 2014-7:11 PM
नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने निजी दूरसंचार कंपनियों की राजस्व ऑडिट के मसले में दो प्रमुख कंपनियों की अलग अलग याचिकाओं पर केन्द्र सरकार और भारत के नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से जवाब तलब किया। 
 
इन कंपनियों की याचिकाओं में इस विषय में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गयी। कैग ने दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि कैग को इन निजी फर्म के राजस्व का अंकेक्षण करने का अधिकार है।
 
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की खंडपीठ ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को भी नोटिस जारी किया है।  इन संचार कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा, ‘‘फैसला :उच्च न्यायालय का: त्रुटिपूर्ण है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अधिनियम की धारा 16 के तहत कैग निजी कंपनियों के खातों का ऑडिट नहीं कर सकता है।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान याचिकाकर्ताओं :संचार कंपनियों: के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।’’केन्द्र सरकार के वकील ने संचार कंपनियों की दलील का विरोध करते हुये कहा कि निजी-सार्वजनिक भागदारी उपक्रमों में लाइसेंसधारक को राजस्व अर्जन के तथ्य केन्द्र सरकार के साथ साझा करने ही होंगे और उच्च न्यायालय ने यही कहा है कि कैग ऐसे मामलों में राजस्व का ऑडिट कर सकता है।
 
उन्होंने न्यायालय से कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक इन कंपनियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जायेगी। साल्वे ने कैग के प्रावधान का हवाला देते हुये कहा कि उच्च न्यायालय के तर्क के अनुसार तो केन्द्र के समेकित निधि में योगदान करने वाले प्रत्येक आयकरदाताओं का भी कैग से आडिट कराया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह गलत व्याख्या है।’’
 

 


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