जाति के आधार पर आरक्षण खत्म हो: जर्नादन द्विवेदी

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Tuesday, February 04, 2014-3:32 PM

नई दिल्ली: कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने जाति के आधार पर आरक्षण को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी से अनुरोध किया है कि सभी समुदायों को इसके दायरे में लाते हुए आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए कोटा लागू किया जाए।

गौरतलब है कि द्विवेदी की जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने की वकालत ऐसे समय में सामने आयी है, जब कांग्रेस अल्पसंख्यक उप कोटा पर जोर देने के साथ ही अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए प्रोन्नति में आरक्षण का समर्थन कर रही है और जाटों के आरक्षण के लिए भी पक्ष में दिख रही है।

कांग्रेस महासचिव द्विवेदी ने कहा कि यह जाति के आधार पर आरक्षण समाप्त हो जाना चाहिए था। दलितों और पिछड़ों में सभी को आरक्षण का लाभ मिलता नहीं मिलता। यह सब उपर वालों को मिलता है। समाजिक न्याय की अवधारणा अब जातिवाद में बदल गयी है और मैं मानता हूं कि तोड़ा जाना चाहिए। राहुल गांधी जी पार्टी घोषणा पत्र के लिए जनता से सीधी राय ले रहे हैं, मैं भी इसका लाभ उठाते हुए उनसे अनुरोध कर रहा हूं कि उन्हें एक बड़ा फैसला करना चाहिए।

जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने के अपने तर्क को उचित ठहराते हुए द्विवेदी ने कहा कि स्थिति पहले से बदली है और अब किसी में यह नैतिक साहस नहीं जो यह कह सके कि वह जातपात का समर्थक है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि वह साठ के दशक में जिस युवा आंदोलन के माध्यम से राजनीति में आये थे उसका मुख्य आधार जात पात के बंधन को तोडऩा और जातपात विहीन समाज का निर्माण करना था ।

भाजपा द्वारा नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने और कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को चुनाव की कमान सौंपे जाने के बारे में पूछने पर कांग्रेस नेता ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर निशाना साधते हुए मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि उस व्यक्ति की बनावट और देश की बनावट बिल्कुल भिन्न है। यह देश उदार और धर्मनिरपेक्ष है। वहीं कांग्रेस की अपने आप को पेश करने की विफलता और मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के आक्रामक प्रचार अभियान के बारे में पूछे जाने पर द्विवेदी ने कहा कि किसी व्यक्ति और एक संगठन के बीच तुलना करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि इसे संगठन बनाम संगठन के रूप में देखा जाना चाहिए कांग्रेस की विचारधारा पूरी तरह से स्पष्ट है और उसी तरह भाजपा की। उस पार्टी के पीछे एक और संगठन है। भाजपा आरएसएस की अदृश्य ताकतों से चल रही है। कांग्रेस 128 साल पुरानी पार्टी है। यह प्रकृति का नियम है। कुछ कमजोरियां होगीं। मैं समझता हूं कोई तुलना नहीं हो सकती। कांग्रेस को आदर सम्मान मिला है और भविष्य में भी कांग्रेस ही आएगी। राहुल गांधी के प्राइमरीज के प्रयोग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसके पीछे विचार यह पता करना है कि स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता किस तरह का उम्मीदवार चाहते हैं। यह एक रचनात्मक पहल है ।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता ने हाल में कहा था कि 206 सीटें पाने के बावजूद उनकी पार्टी को 2009 में गठबंधन सरकार नहीं बनानी चाहिए थी क्योंकि उसने कांग्रेस सरकार के लिए जनादेश मांगा था । उन्होंने कहा कि अब 2014 का चुनाव है यह पूरी तरह से स्पष्ट रहे कि हम सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे । कांग्रेस ने पार्टी घोषणा पत्र के लिए और पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार मनमोहन सिंह के लिए जनता का समर्थन मांगा था न न कि संप्रग दो के लिए ।





 


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