चौरीचौरा हत्याकांड-ब्रिटिश हुकूमत में हम आग लगा देंगें: रामप्रसाद बिस्मिल

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Tuesday, February 04, 2014-5:21 PM
गोरखपुर: ब्रिटिश हुकूमत  को हिलाकर रखने में चौरीचौरा के सपूतों ने आज ही के दिन 1922 में पुलिस ज्यादती से क्षुब्ध क्रांतिकारियों ने चौरीचौरा थाने में आग लगा दी थी, जिसमें थानाध्यक्ष समेत 23 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए थे। घटना में 222 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिसमें से 19 को दो जुलाई 1923 को फांसी की सजा हुई थी। चौरीचौरा उत्तर-प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक कस्बा है।इस घटना को चौरीचौरा कांड के नाम से जाना जाता है। आजाद भारत में उन्हीं सपूतों की याद में बना शहीद स्मारक अपनों की लापरवाही से उपेक्षा का शिकार है।अंग्रेजी शासन के विरोध में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी।

उस समय चौरीचौरा ब्रिटिश कपड़ों व अन्य वस्तुओं की बड़ी मंडी थी। आंदोलन के तहत देशवासी ब्रिटिश उपाधियों, सरकारी स्कूलों व वस्तुओं का त्याग कर रहे थे। इसी के तहत स्थानीय बाजार में भी विरोध जारी था। दो फरवरी 1922 को आंदोलनकारियों के दो नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके विरोध में चार फरवरी को करीब 3000 आंदोलनकारियों ने थाने के सामने प्रदर्शन कर ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ नारेबाजी की। इसे रोकने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की, लेकिन सत्याग्रहियों पर इसका असर नहीं हुआ, फिर पुलिस ने सीधे फायरिंग कर दी।

इसमें तीन लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए। इसी बीच पुलिस की गोलियां खत्म हो गई और वह थाने में छिप गए। आक्रोशित क्रांतिकारियों ने थाने में आग लगा दी। इस घटना में दरोगा गुप्तेश्वर सिंह समेत कुल 23 पुलिस कर्मी जलकर मर गए। इसी घटना के बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया। कांग्रेस में रामप्रसाद बिस्मिल और उनके नौजवान सहयोगियों ने गांधी जी का विरोध किया था। गांधी जी विद्रोही विचार धारा के लोंगों को हुल्लड़बाज कहा था।

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