किसी बिल के पास होने की उम्मीद नहीं: पी चिदंबरम

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Wednesday, February 05, 2014-1:39 PM

नई दिल्ली:  वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज कहा कि उन्हें संदेह है कि संसद के इस सत्र में लेखानुदान को छोड़ कोई और महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो सकेगा।

उन्होंने कहा, ‘यदि संसद की बैठक कानून पारित करने के लिए न हो, और आज से आप देखेंगे कि संसद की बैठक होगी, पर मुझे संदेश है कि यह कोई नया कानून पारित करेगी।’ उन्होंने कहा ‘‘हमें हर रोज संसद में उपस्थित होने की रस्म अदा करनी है और खाली हाथ लौट जाना है।’’  चिदंबरम श्रीराम कालेज आफ कामर्स (एसआरसीसी) के एक सम्मेलन में छात्रों को संबोधित कर रहे थे।

बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि वित्त विधेयक, लेखानुदान और विनियोग विधेयक पारित हो जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा ‘‘लेकिन यदि यह बिना बहस या चर्चा के पारित होता है तो  मुझे खुशी नहीं होगी। मैं चाहता हूं कि यह चर्चा और बहस के बाद पारित हो।’’ सरकार ने कई विधेयक को सूचीबद्ध किया है जिसे वह मौजूदा सत्र में पारित कराना चाहती है।

मौजूदा संसद सत्र 21 फरवरी को समाप्त होगा। इस सत्र में अंतरिम बजट पारित कराने के अलावा सरकार तेलंगाना विधेयक औ भ्रष्टाचार-रोधी प्रावधानों वाले कुछ विधेयक पारित कराना चाहती है। इस बीच तेलंगाना विधेयक पर संभावित हंगामे को हिचकोली बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद भवन से बाहर संवाददाताओं से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी पक्षों के सदस्य समझदारी के साथ पूर्वाग्रह छोड़ कर इस सत्र का कामकाज सहज ढंग से चलाने में सहयोग देंगे।

चिदंबरम ने आम चुनाव से पहले सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में कटौती के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि सरकार ने कोई रियायत नहीं दी है बल्कि सिर्फ कीमत को तर्कसंगत बनाया है। उन्होंने कहा ‘‘सरकार ने कोई रियायत नहीं दी है। सिर्फ आप इसे रियायत कहते हैं इसलिए यह रियायत नहीं बन जाती।

सरकार ने कीमतों को थोड़ तर्कसंगत बनाया है और इसका फैसला तेल विपणन कंपनियां करती हैं।’’ सरकार ने सीएनजी की कीमत में करीब 15 रपए प्रति किलो और रसोई के काम आने वाली पाइप्ड गैस की कीमत पांच रपए प्रति क्यूबिक मीटर घटाई है। वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि 18 महीने पहले राजकोषीय घाटे के लिए जो लक्ष्मण रेखा तय की गई थी उसे पार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा ‘‘कोई संदेह न पालें ... राजकोषीय घाटा :2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले: 4.8 प्रतिशत पर या इससे कम ही रखा जाएगा।’’ चिदंबरम ने यह भी कहा कि जब वह अपना कार्यभार छोड़ेंगे तो अर्थव्यवस्था दो साल पहले जिस मुकाम पर थी उससे ज्यादा स्थिर अवस्था में छोड़कर जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत में युवा आबादी और संसाधानों को देखते हुए अगले 20-30 साल आठ-नौ प्रतिशत की दर से वृद्धि की संभावना है। वृद्धि के आड़े आनेवाली मुश्किलों को दूर किया जाना चाहिए।


 


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