कल से फिर शुरू हो रहा उत्तराखंड विधानसभा का सत्र

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Wednesday, February 05, 2014-3:41 PM

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा का पहला सत्र कल से पुन: शुरू होने जा रहा है। इससे पहले यह आयोजित सत्र गत 21 जनवरी को स्थगित कर दिया गया था। यह सत्र नये मुख्यमंत्री हरीश रावत की राजनीतिक और प्रशासनिक परिपक्कता की अग्निपरीक्षा भी साबित होगा। इसी सत्र में वह अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगे जो आगामी लोकसभा चुनावों की ²ष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा। लोकसभा चुनावों में अच्छे परिणामों के लिये ही उनको दिल्ली से देहरादून भेजा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आज कैबिनेट की बैठक भी होने जा रही है। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ ही प्रदेश के सालाना बजट पर पुनॢवचार किया जा सकता है। ताकि मुख्यमंत्री बजट में अपनी प्राथमिकताओं का समावेश कर सकें।

चूंकि इसी सप्ताह पंचायत चुनावों के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लगने की संभावना के चलते मुख्यमंत्री के पास बहुत ही अल्प समय रह गया है, इसलिये उन्हें कम से कम समय में ऐसे दूरगामी निर्णय लेने होंगे ताकि पंचायत चुनावों के साथ ही आगामी लोकसभा चुनावों में पार्टी को इसका अच्छा प्रतिफल मिल सके। जानकारों के अनुसार रावत को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा बनाये गये मंत्रिमंडल से काम चलाना पड रहा है। इस बार भी उन्हीं मंत्रियों की टीम है। बहुगुणा अपने पद से इस्तीफा देने से पहले ही कैबिनेट की बैठक आयोजित कर कई महत्वपूर्ण फैसले लेने के साथ ही सालाना बजट भी केबिनेट में पास करा चुके थे।

सूत्रों के अनुसार हाल ही में बहुगुणा मंत्रिमडल द्वारा विधानसभा में रखे जाने के लिये पारित कराया गया बजट चुनाव आचार संहिताओं के कारण पहले ही समय से पहले जल्दबाजी में तैयार किया गया है। उस पर भी उसमें सारी प्राथमिकताएं पूर्व मुख्यमंत्री की हैं। इस चुनावी बजट में विजन भी बहुगुणा का ही है और जरूरी नहीं कि यह रावत के विजन से मेल खाये। वैसे भी यह बजट पहली बार फरवरी के पहले सप्ताह में आ रहा है, अन्यथा 28 फरवरी को केंद्रीय बजट के आने पर उसके प्रावधानों के अनुसार अब तक मई-जून में राज्य का बजट पेश किया जाता था। जानकारों के अनुसार बजट पर पुनॢवचार करने के लिये ही रावत मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने दिल्ली दौरे में  इंदिरा हृद्येश को अपने साथ ले गये थे।

सोमवार को चमोली दौरे पर भी वह इंदिरा को अपने साथ लेकर गये। वह पहले ही कह चुके हैं कि इंदिरा को वित्त मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जायेगी। समयाभाव के कारण वह जब भी कुछ समय मिल रहा है उसका सदुपयोग करते हुये उनके द्वारा तैयार बजट प्रावधानों पर चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार नारायण दत्त तिवारी के बाद पहली बार इस सत्र में एक दूरदर्शी बजट आने की संभावना है, जिसमें रावत का विजन साफ नजर आयेगा। इसके साथ ही उसमें कई लोकलुभावन घोषणाएं भी शामिल होंगी ताकि पंचायत और लोकसभा चुनावों में जनता को प्रभावित किया जा सके।

 


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