महरौली में ऐतिहासिक दरगाहों पर खतरे का साया

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Wednesday, February 05, 2014-2:46 PM

नई दिल्ली (वसीम सैफी): महरौली के इलाके में बड़े भू-भाग पर बनी करीब दर्जन भर मस्जिदों, दरगाह व कब्रिस्तान के अस्तित्व पर इन दिनों खतरे का साया मंडरा रहा है। हाल ही में एल.जी. हाऊस में एक बैठक हुई, जिसमें इस विषय में चर्चा हुई कि क्यों न इस भू-भाग को हेरिटेज पार्क के रूप में डिवैल्प कर दिया जाए। इस बैठक में वक्फ बार्ड समेत सभी विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इन चर्चाओं के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों में ङ्क्षचताएं व आक्रोश बढऩे लगे है ।

इस बाबत दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक चौधरी मतीन अहमद का कहना है कि महरौली लाडो सराये में सैंकड़ों कब्रें और कई ऐतिहासिक मस्जिदें व दरगाह हैं। इनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बरदाश्त नहीं होगी। अगर कोई इनके आस्तित्व को खतरे में डालेगा तो उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। समाज सेवी हाफिज मोहम्मद जावेद ने बताया कि लाडो सराये इलाके में काफी बड़ा भू-भाग ऐसा है जहां सैंकड़ों कब्रें करीब एक दर्जन मस्जिदें, मदरसे व कई दरगाह हैं। क्रबिस्तानों से तो लोग दिली आस्था के साथ जुड़े हुए हैं। न जाने कितने लोग ऐसे होंगे जिनके पूर्वजों व खानदान के लागों की कब्रें यहां हैं। अगर इन्हें नष्ट किया जाता है तो लोगों की आस्था चोट पहुंचेगी। उनका कहना है कि यहां ऐसा कोई काम न हो जिससे एक समुदाय के लोगों के दिलों को किसी भी तरह की ठेस पहुंचे। 

महरौली स्थित लाडो सराये के इस बड़े भू-भाग पर बरसों पुरानी मस्जिदों में कई मदरसे चल रहे हैं। इन मदरसों में करीब पांच सौ से अधिक बच्चे दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं। मो. जावेद ने बताया कि प्रशासन के इस कदम के चलते बच्चों के भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगा है। उन्होंने बताया कि यहा कई ऐसी मस्जिदें भी हैं जो दिल्ली की जामा मस्जिद से भी बहुत पुरानी बताई जाती हैं। सरकार व प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे स्थल को संजोकर रखे, न कि उनक अस्तित्व को खतरे में डालें।


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