गैर सहायता वाले निजी स्कूलों की याचिका पर न्यायालय ने केन्द्र और दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा

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Wednesday, February 05, 2014-9:29 PM

 नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय गैर सहायता वाले निजी अल्पसंख्यक स्कूलों में वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन और भत्ते के सवाल विचार के लिये तैयार हो गया है। न्यायमूर्ति एच एल गोखले और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने गैर सहायता वाले अल्पसंख्यक स्कूल श्रीगुरू हरकिशन माडल स्कूल की याचिका पर केन्द्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है।

इस स्कूल का दावा है कि उसे सरकारी स्कूलों के समान अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है।
स्कूल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि गैर सहायता वाले अल्पसंख्यक स्कूलों को भी छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप ही वेतन देना होगा।

याचिकाकर्ताओं के वकील विनय कुमार गर्ग और विवेक शर्मा ने दलील दी कि उनके कर्मचारियों के लिये वेतन और भत्ते का निर्धारण गैर सहायता वाले अल्पसंख्यक स्कूल के वित्तीय प्रबंधन में हस्तक्षेप समान होगा। उनका तर्क था कि इससे संविधान के अनुच्छेद 30 :1: का उल्लंघन होता है।

 स्कूल का यह भी तर्क है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के अधिकारों के संदर्भ में सरकार नियम बनाने की सीमा तक ही हस्तक्षेप कर सकती है लेकिन उसे अनुच्छेद 30 में प्रदत्त अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार शर्ते नहीं लगा सकती जो अंतत: गैर सहायता वाले अल्पसंख्यक संस्थान के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को प्रभावित करे।


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