गाजियाबाद मैट्रो रूट में समझौता बना रोड़ा

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Thursday, February 06, 2014-1:26 AM

नई दिल्ली, (धनंजय कुमार): गाजियाबाद निवासियों को मैट्रो में सफर कराने का सपना भले ही पिछले कई वर्षों से दिखाया जा रहा हो लेकिन यहां मैट्रो पहुंचने की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है सरकार के स्तर पर अब तक यह मामला ठंडे बस्ते में दबा हुआ है।

केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक लड़ाई का नतीजा यह है कि दिलशाद गार्डन से गाजियाबाद के बीच मैट्रो पहुंचाने के लिए आज तक आपसी समझौता भी नहीं हो सका है, जिसके बिना मैट्रो लाइन यहां तक पहुंचाना संभव ही नहीं है।

हालांकि बीते 31 जनवरी को डी.एम.आर.सी. तथा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने मिलकर इस योजना को ऑक्सीजन देने का काम जरूर किया लेकिन आगे की राह इतनी आसान नहीं है क्योंकि अगले महीने तक लोकसभा चुनाव की अधिसूचना भी जारी हो जाने की संभावना जताई जा रही है।


2 वर्ष पहले ही मिल चुकी है अनुमति: दिलशाद गार्डन से गाजियाबाद तक मैट्रो पहुंचाने की फाइल को 17 अक्तूबर 2012 को मंजूरी मिल गई थी लेकिन कभी उत्तर प्रदेश सरकार तो कभी दिल्ली सरकार की ओर से लचीला रूख अपनाया जाता रहा। पिछले वर्ष 8 मई को यू.पी. की अखिलेश सरकार ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर इसे हरी झंडी देने की मांग की थी।


इस 100 करोड़ की लागत बढ़ गई है: शुरूआत में यह योजना 1770 करोड़ रुपए की थी जिसमें 1116 करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश सरकार को देने थे। बाकी खर्च केंद्र सरकार और डी.एम.आर.सी. को देना था। यू.पी. कैबिनेट ने इस फंड को पास भी कर दिया था। अब तो इस योजना पर 100 करोड़ रुपए का खर्च और बढ़ गया है।


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