1984 दंगे: सज्जन कुमार ने फाइल नहीं दिखाने के गवाह के अनुरोध का विरोध किया

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Thursday, February 06, 2014-10:05 AM

नई दिल्ली: वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में सुनवाई का सामना कर रहे कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार और तीन अन्य ने कल यहां एक अदालत में दिल्ली के एक सरकारी अधिकारी की इस याचिका का विरोध किया कि पूर्व सांसद के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी से संबंधित पूरी फाइल पेश करने से उसे छूट दी जाए। जिला न्यायाधीश जेआर आर्यन के सामने जवाबी हलफनामे में कुमार ने कहा कि अभियोजन पक्ष दस्तावेज अपने पास नहीं रख सकता क्योंकि अदालत को यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ अभियोजन के लिए सरकार द्वारा मंजूरी वैध है या नहीं।

 

कुमार ने हलफनामे में दावा किया कि अभियोजन पक्ष के गवाह दिल्ली सरकार के तत्कालीन उपसचिव (गृह) और फिलहाल दिल्ली के उपराज्यपाल के निजी सचिव विश्वेंद्र सिंह का यह बयान गुमराह करने वाला है कि उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल के आदेश द्वारा जारी एक जनवरी 2010 की मंजूरी के आदेश की जांच की थी। अधिवक्ता अनिल शर्मा के जरिये दायर हलफनामे में कहा गया कि बचाव पक्ष ने उचित जिरह सुनिश्चित करने के लिए अदालत के सामने बयान में अभियोजन द्वारा जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया गया उनकी प्रति मांगी थी।

 

इसमें कहा गया कि यह सही फैसले पर पहुंचने के लिए मिनी सुनवाई की तरह है। इसलिए, इसका खुलासा नहीं करने में कुछ भी जनहित में नहीं है। अगर ऐसा होता तो वह अदालत के सामने गवाही में इसे लेकर नहीं आते। अदालत ने सीबीआई को अपना जवाब दायर करने का निर्देश देते हुये इस मामले में पूरी फाइल पेश नहीं करने के लिए गवाह को विशेषाधिकार देने के मुददे पर आदेश हेतु 12 फरवरी की तारीख तय की। सिंह अभियोजन पक्ष के औपचारिक गवाह हैं जिन्हें सीबीआई यह साबित करने के लिए लाई है कि आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी गई थी।


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