विधायक पर दर्ज मुकदमे के मामले में समाधान निकाला जायेगा: रावत

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Thursday, February 06, 2014-4:57 PM

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रूद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ दर्ज दंगा भड़काने के मुकदमे को तत्काल वापस लिये जाने की मांग पर अड़ी मुख्य विपक्षी भाजपा को आज भरोसा दिलाया कि अधिकारियों को इस मामले का समाधान निकालने के निर्देश दे दिये गये हैं। राज्य विधानसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच रावत ने कहा कि मामले के न्यायालय के विचाराधीन होने के कारण अधिकारियों से इसके संबंध में हुई बातचीत का ब्यौरा सदन के पटल पर नहीं रखा जा सकता। लेकिन अधिकारियों को आज शाम तक इस मसले का समाधान निकालने के निर्देश दिये जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘एक विधायक के सम्मान और गरिमा की रक्षा का दायित्व केवल विपक्ष का ही नहीं बल्कि हमारा भी है।’’

रावत द्वारा आश्वासन दिये जाने पर विपक्षी सदस्य शांत हो गये और विपक्ष के नेता अजय भट्ट ने कहा कि नेता सदन द्वारा दिलाये गये भरोसे पर विश्वास न किये जाने की कोई वजह नहीं है। अक्टूबर, 2011 में रूद्रपुर में हुए सांप्रदायिक दंगों को भड़काने के मामले में आरोपी ठुकराल के खिलाफ अदालत द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किये जाने के बाद भी उन्होंने समर्पण नहीं किया जिसके बाद उन्हें भगोडा घोषित कर उनकी संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। राज्य पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले व्यक्ति के लिये ढाई हजार रूपये का इनाम भी घोषित किया है।

इससे पहले, एक पखवाडे के अंतराल के बाद आज सदन की कार्यवाही के दोबारा शुरू होते ही भट्ट की अगुवाई में भाजपा सदस्यों ने विधायक राजकुमार ठुकराल पर रूद्रपुर में दंगा भडकाने के दर्ज मामले को वापस लेने का सरकार पर दबाव बनाते हुए जमकर हंगामा किया जिससे अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। भाजपा सदस्यों ने ठुकराल को अक्टूबर, 2011 में हुए दंगों के मामले में उन्हें साजिशन फंसाये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के सात महीने बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। भट्ट ने कहा कि वैसे भी ठुकराल का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उनके खिलाफ दर्ज मामले को सरकार को तत्काल वापस लेना चाहिये।

अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भाजपा सदस्यों से इस मामले को बाद में उठाने का आग्रह करते हुए उनसे अपनी सीट पर बैठने को कहा, लेकिन उत्तेजित सदस्य अपनी मांग पर अडे रहे और अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। जब काफी देर तक शोर शराबे की स्थिति बनी रही तो अध्यक्ष कुंजवाल ने पहले सदन की कार्यवाही साढे 11 बजे तक के लिये और फिर 11.45 बजे तक और बाद में 12.20 बजे तक के लिये स्थगित कर दी जिसमें प्रश्नकाल की पूरी अवधि बीत गयी।


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