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सोनी सोरी को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली

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Friday, February 07, 2014-3:22 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आदिवासी शिक्षिका सोनी सोरी और पत्रकार लिंगराम कोदोपी को आज जमानत प्रदान कर दी। इन दोनों पर कथित तौर पर एस्सार समूह से माओवादियों की तरफ से पैसा लेने का आरोप है। न्यायमूर्ति एस एस निज्जर और न्यायमूर्ति ए के सीकरी की खंडपीठ ने इन दोनों को नियमित जमानत प्रदान कर दी। शीर्ष अदालत ने इन्हें जमानत देने से इंकार करने के छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया।

36 वर्षीय सोनी सोरी और उसका भतीजा कोदोपी (25 वर्ष) को माओवादियों के सहयोगी के रूप में काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था जिनपर छत्तीसगढ़ में एस्सार समूह से विद्रोहियों की तरफ से संरक्षण प्रदान करने के एवज में कथित तौर पर धन लेने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, लिंगराम कोदोपी और एस्सार स्टील लिमिटेड से जुड़े ठेकेदार को छत्तीसगढ के दांतेवाड़ा जिले के पालनार गांव में साप्ताहिक बाजार से 9 सितंबर 2011 को 15 लाख रूपये के साथ पकड़ा गया जो कथित तौर पर माओवादियों को भुगतान किया जाना था।

पुलिस ने दावा किया था कि सोरी भी इस संबंध में कोदोपी से जुड़ी थी लेकिन घटनास्थल से भागने में सफल रही। सोरी को 4 अक्तूबर 2011 को नयीदिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। एस्सार स्टील लिमिटेड के महाप्रबंधक डी वी सी एस वर्मा को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। दांतेवाड़ा की जिला अदालत ने वर्मा और ठेकेदार लाला को जमानत दे दी थी। 

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