ऐतिहासिक इमारतों के साथ प्राचीन भवनों का भी संरक्षण हो: अखिलेश

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Friday, February 07, 2014-9:51 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि इस विरासत को भावी पीढिय़ों के लिए किस रूप में छोड़कर जाएंगे, इस पर विचार करना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को यहां छतर मंजिल के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के संबंध में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इतिहास हमें सीखने का अवसर प्रदान करता है। यह भी सच है कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक भवन और उनका स्थापत्य बताता है कि पिछली पीढ़ी के लोगों की सोच क्या थी।

यादव ने लखनऊ की तमाम खूबियों खासकर इसकी गंगा-जमुनी तहजीब और सौहार्द की परम्परा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में पर्यटन के विकास की अपार सम्भावनाएं हैं। आगरा, मथुरा, वृन्दावन में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां आने के लिए प्रेरित करने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगरा-लखनऊ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे इस दिशा में मददगार साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयास ये होना चाहिए कि प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ अन्दरूनी इलाकों के प्राचीन भवनों का भी संरक्षण किया जाए। उन्होंने मुख्य सचिव से यह अपेक्षा की कि कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले सुझावों को लागू करने के लिए बजट में धनराशि का प्राविधान किया जाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में पर्यटन पर ध्यान देने व पार्क का निर्माण कराने का उल्लेख किया था। इसके दृष्टिगत 400 एकड़ क्षेत्रफल में जनेश्वर मिश्र पार्क के विकास की योजना है। उन्होंने नदियों के जल को स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त रखे जाने पर भी बल दिया।

लखनऊ के विकास के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की चर्चा करते हुए यादव ने कहा कि उच्चस्तरीय कैंसर संस्थान, आई.टी.सिटी., ट्रिपल आई.टी. और स्टेडियम से शहर को खास पहचान मिलेगी। इसी प्रकार मेट्रो रेल नागरिकों को आवागमन की त्वरित सुविधा प्रदान करेगी। इस मौके पर संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमारी कोरी ने कहा कि छतर मंजिल इन्डो-इटालियन स्थापत्य का उदाहरण है।

इस भवन के समीप फरहत बख्श कोठी है, जिसका निर्माण इन्डो-फ्रेंच शैली में किया गया था। उन्होंने बताया कि भवन के संरक्षण के बाद इसमें सिटी म्यूजियम और सिटी साइंस म्यूजियम की स्थापना की योजना है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कार्यशाला की स्मारिका का विमोचन भी किया। कार्यशाला के दौरान राज्य संग्रहालय द्वारा ‘गुजिश्ता लखनऊ’ विषयक चित्र-प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है।


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