विधेयक पारित करने के लिए केंद्र की मंजूरी अनिवार्य नहीं: केजरीवाल

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Friday, February 07, 2014-10:24 PM

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली विधानसभा में जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य नहीं है। उपराज्यपाल नजीब जंग को लिखे पत्र में केजरीवाल ने उनसे केंद्र सरकार के सामने घुटने न टेकने की अपील की है। तीन पृष्ठों के अपने पत्र में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने जोर दिया है कि उनकी सरकार ने विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास नहीं भेजकर कोई गलत काम नहीं किया है। सरकार को बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस ने इसके लिए आप सरकार की आलोचना की है।

अपने पत्र में केजरीवाल ने कहा है कि आप सरकार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुद्गल और वकीलों पी.वी. कपूर, के. एन. भट्ट एवं पिनाकी मिश्र ने बताया है कि विधेयक को केंद्र सरकार को दिखाने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा है, ‘‘मैं जानता हूं कि आप पर कांग्रेस और गृह मंत्रालय का भारी दबाव है।’’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘‘मैं जानता हूं कि आने वाले दिनों में आप पर लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अनुमति नहीं देने का दबाव बनाया जाएगा।’’

‘‘मैं जानता हूं कि वे आप पर दबाव डालेंगे ताकि आप दिल्ली विधानसभा में जन लोकपाल विधेयक को पेश करने की अनुमति नहीं दें।’’ ‘‘वे जानते हैं कि यदि विधेयक पारित हुआ तो उनमें से कई लोग जेल में होंगे।’’ ‘‘मैं जानता हूं कि मेरी सरकार को बदनाम करने के लिए वे कुछ खास सूचनाएं लीक करने के लिए आपके कार्यालय का दुरुपयोग करेंगे।’’

केजरीवाल ने कहा है, ‘‘आपने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली है, किसी दल या गृह मंत्रालय के प्रति निष्ठा की नहीं। कृपया संविधान को मरने मत दीजिए।’’ केजरीवाल ने यह पत्र सालिसीटर जनरल की कथित राय की प्रतिक्रिया में लिखा है। सालिसीटर जनरल ने उपराज्यपाल को दी गई अपनी राय में कहा है कि दिल्ली विधानसभा बिना केंद्र सरकार की मंजूरी के विधेयक पारित नहीं कर सकती है।

केजरीवाल ने कहा है कि इसके लिए कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। इसके विपरीत उन्होंने गृह मंत्रालय के उस निर्देश को ही असंवैधानिक करार दिया है जिसमें दिल्ली सरकार को दिल्ली विधानसभा में विधेयक पेश करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेने के लिए कहा गया है। उन्होंने सवाल उठाया, ‘‘यदि हर विधेयक को पारित कराने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेना जरूरी है तो फिर दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव ही क्यों कराया गया?’’


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