देवयानी ने अमेरिकी अदालत में वीजा जालसाजी मामला खारिज करने का आग्रह किया

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Saturday, February 08, 2014-3:53 PM

न्यूयार्क: भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े ने इस आधार पर अपने खिलाफ वीजा जालसाजी मामला खारिज करने का आग्रह करते हुये दावा किया है कि यह मामला उन्हें पूर्ण राजनयिक छूट मिलने के एक दिन बाद अदालत में दाखिल किया गया है और वह अमेरिका के न्यायक्षेत्र में नहीं आती हैं। देवयानी के वकील डैनियल आर्शाक ने यहां एक संघीय अदालत में संघीय अभियोजक प्रीत भराड़ा के मेमोरंडम पर भारतीय राजनयिक का जवाब दाखिल किया। भराड़ा ने आरोप खारिज करने के देवयानी के ‘मोशन’ का विरोध किया था। 

आर्शाक ने कल दाखिल 17 पन्नों के अपने ‘मोशन’ में कहा कि जब ‘इंडिक्टमेंट’ लौटाया गया था तो देवयानी उस वक्त अमेरिका में मौजूद थीं और अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन में उनके राजनयिक दर्जे की स्वीकृति ने उन्हें राजनयिक छूट दे दी जिससे सारी ‘कार्यवाही या कार्रवाई’ रद्द कर दी जाए।’’ 

आर्शाक ने कहा, ‘‘तात्कालिक इंडिक्टमेंट लौटा दिया गया और खोबरागड़े की, अमेरिका से, रवानगी से पहले अदालत में दाखिल किया गया जबकि उन्हें तब भी राजनयिक के रूप में मान्यताप्राप्त थी और तब भी राजनयिक छूट से लैस थी... अभियोजन तब भी उस अवैध प्रक्रिया के साथ आगे नहीं बढ़ सकता था और अब भी नहीं बढ़ सकता है।’’

बहरहाल, आर्शाक ने माना कि भविष्य में देवयानी पर मुकदमा चलाने से अभियोजन को नहीं रोका जा सकता। इसके साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि उनके खिलाफ मौजूदा मामला खारिज किया जाए क्योंकि जब आरोप दाखिल किए गए थे तो उन्हें राजनयिक छूट हासिल थी। 

आर्शाक का यह मोशन भराड़ा की ओर से अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इस घोषणा के एक हफ्ते बाद आया जिसमें कहा गया है कि गिरफ्तारी के वक्त देवयानी को गिरफ्तारी या हिरासत से से कोई छूट नहीं हासिल थी और उन्हें अभी आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों के अपराध पर अभियोजन से छूट नहीं हासिल है।  आर्शाक ने कहा कि आरोपपत्र (इंडिक्टमेंट) को खारिज कर देना चाहिए क्योंकि देवयानी को जो छूट मिली है वह पीछे से लागू है।


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