इशरत जहां मामला: मुकदमे के लिए गृहमंत्रालय की पूर्व मंजूरी जरूरी: एजी

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Saturday, February 08, 2014-2:55 PM

नई दिल्ली: अटार्नी जनरल ने सीबीआई को बताया है कि इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के खिलाफ मामला चलाने के लिए गृहमंत्रालय की पूर्व मंजूरी जरूरी है। अटार्नी जनरल जी. ई. वाहनवती की यह राय कल आई है। उससे एक दिन पहले सीबीआई ने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में आईबी के पूर्व विशेष निदेशक राजिन्दर कुमार को हत्या के मामले में आरोपित किया जबकि तीन अन्य मौजूदा अधिकारियों  - पी मित्तल, एमके सिन्हा और राजीव वानखेडे को आपराधिक साजिश रचने और अन्य अपराधों के लिए आरोपित किया।

वाहनवती ने अपनी कानूनी सलाह में कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 197 के तहत अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी है। इसके बगैर कार्यरत आईबी अधिकारियों के खिलाफ मामले नहीं चलाए जा सकते। उन्होंने कहा कि अवकाशग्रहण करने के बावजूद कुमार के खिलाफ मामला चलाने के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी है।

वाहनवती ने यह कहने के लिए निकट अतीत के उच्चतम न्यायालय के दो फैसलों का जिक्र किया कि आईबी कर्मी अपनी आधिकारिक ड्यूटी के निर्वहन के लिए कार्रवाई कर रहे थे या कार्रवाई करते समझे जा रहे थे। इसलिए वे भारतीय दंडसंहिता की धारा 197 के अंतर्गत आते हैं।  गृह मंत्रालय आईबी का प्रशासनिक मंत्रालय है।
 

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