इच्छा मृत्यु की मांग

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Saturday, February 08, 2014-5:12 PM

नई दिल्ली : एक प्राईवेट कंपनी में काम करने वाला पीड़ित लंबे समय से न्याय के लिए जंतर-मंतर पर बैठा है। लेकिन कोई उसकी सुध लेने के लिए अब तक आगे नही आया। हार कर पीड़ित अब इच्छा मृत्यु की मांग कर रहा है। पीड़ित ने इस बाबत राष्ट्रापति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल सहित आला नेताओं को इस बाबत पत्र लिखकर न्याय की मांग या फिर इच्छा मृत्यु की मांग की है।

पीड़ित रणजीत मिश्रा का कहना है कि उसका गुनाह सिर्फ इतना है कि उसने वर्ष १९९७ में अपनी कंपनी से हक (वेतन व डिविडेंट) की बात की थी। लेकिन कंपनी ने उसे नौकरी से ही निकाल दिया। इस बाबत पीड़ित ने दिल्ली की एक जिला न्यायालय में याचिका दायर की और नौकरी के संबंध में कारण पूछा। लेकिन कंपनी ने उसे कंपनी के खिलाफ जाने का सबक सिखाने के लिए न्यायिक क्षेत्र दिल्ली से हरियाणा में करवा लिया। जहां उन्होंने गुडगांव पुलिस से सांठ-गांठ कर उल्टा उस पर दस लाख रुपए के गबन का आरोप लगा लगा मुकदमा दर्ज करा दिया। अदालत ने उन्हें बेकसूर होते हुए भी तीन साल की सजा सुना दी। पीड़ित का आरोप है कि वह अब तक सरकार व प्रशासन को ३२६ शिकायतें इंसाफ के लिए लिख चुके हैं, लेकिन सब खामोश और मौन हैं।


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