दिल्ली सरकार के खजाने में नहीं आ रहा पैसा

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Sunday, February 09, 2014-12:12 AM
नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): आम आदमी पार्टी की सरकार की आवश्यक मुश्किलें बढऩे वाली है। सरकार के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह आने वाली है कि खजाने में पैसा ही नहीं आ रहा है। इसके चलते उसे अपनी लोकलुभावन योजनाओं को सिरे चढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार कई तरह के विवादों में उलझी हुई है और वह वित्तीय प्रबंधन के मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।
 
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सरकारी खजाने में अनुमान से 20 प्रतिशत कम राजस्व आने से सरकार के माथे पर शिकन पडऩे शुरू हो गए हैं। सरकार आने वाले दिनों में कई लोकलुभावन योजनाएं शुरू करने की तैयारी में है। मगर खजाने में राजस्व की कमी ने उसे दुविधा में डाल दिया है। हालांकि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली में पैसे की कमी नहीं है।
 
ईमानदारी और नीयत की कमी थी और इस सरकार के अंदर नीयत और ईमानदारी है लेकिन अब हकीकत सामने आने पर सरकार के पसीने छूट रहे हैं। फिलहाल मुफ्त बिजली-पानी के लिए सरकार को हर हाल में संबंधित विभागों को रकम आबंटित करनी है। दिल्ली सरकार के कमाई का आंकड़ा इस साल बेहद खराब रहा है।
 
पूर्ववर्ती शीला सरकार ने 2013-14 के वित्तीय वर्ष के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की राजस्व वसूली तय की थी लेकिन वित्तीय वर्ष पूरा होने में महज डेढ़ महीना बचा है और सरकार महज 20 हजार करोड़ रुपए की कमाई कर पाई है। ऐसे में उसके हसीन वायदों का क्या होगा? यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने हाल में एक उच्चस्तरीय बैठक में निर्धारित राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि पैसे की तंगी से नई योजतनाओं को लागू करने में परेशानी आ सकती है।              

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