भारतीय न्यायालयों में तीन करोड़ से ज्यादा मामले विचाराधीन: राष्ट्रपति

  • भारतीय न्यायालयों में तीन करोड़ से ज्यादा मामले विचाराधीन: राष्ट्रपति
You Are HereNational
Sunday, February 09, 2014-1:27 AM

मुंबई: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भारतीय न्यायालयों में भारी तादाद में विचाराधीन मामलों के लंबित होने पर गहरी चिंता जताई। मुखर्जी ने यहां पश्चिम भारत अधिवक्ता संगठन (एएडब्ल्यूआई) की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि भारतीय न्यायालयों में वर्तमान में तीन करोड़ 10 लाख मामले विचाराधीन है जो कि बेहदचिंता की बात है। उन्होंने कहा कि एएडब्लूआई भारत का सबसे पुराना बार संगठन है। इसने न केवल नियम कानूनों से देश को परिचित कराया बल्कि स्वतंत्रता के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पी.बी गजेंद्रधकर, जेसी शाह और वाई वी चन्द्रचूड इस संगठन के सदस्य रहे है।

इस मौके पर देश के मुख्य न्यायाधीश पी सदशिवम ने कहा कि जन अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायधीशों की महत्वपूर्ण सार्थक भूमिका है। न्यायालय तंत्र के सुढीकरण के लिए न्यायाधीशों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि एवं तालुका स्तर से लेकर उच्चतम न्यायालय तक सभी अदालतों को कम्प्यूटर पर जोड़े जाने का कार्य चल रहा है। कार्यक्रम को केन्द्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वान, राज्यपाल के शंकरनारायणन एवं मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह ने भी संबोधित किया।

किशनचंद्र चेलाराम कालेज की हीरक जयंती समारोह के अवसर पर यहां एक अन्य कार्यक्रम में मुखर्जी ने भारत की प्राचीन समृद्धशाती उच्च शिक्षा व्यवस्था के बारे में जिक्र करते हुए शिक्षा की वर्तमान स्थित पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाकर हम भारत की स्थिति को विश्व में प्रभावपूर्ण तरह से मजबूत कर सकते है। मुखर्जी ने कहा कि विश्व के शीर्ष दो सौ विश्वविद्यालयों में किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय का नाम न देख उन्हें बेहद दुख होता है. यह देश के लिये अत्यंत चिंता का विषय है।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You