गिलानी पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग, अदालत करेगी याचिका पर फैसला

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Sunday, February 09, 2014-10:29 AM

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने उस याचिका पर 19 फरवरी को आदेश पारित करने का फैसला किया है जिसमें कश्मीर तथा भारत के अन्य हिस्सों में लोगों के बीच कथित ‘‘नफरत’’ फैलाने के लिए अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और तीन अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया गया है। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विजेता सिंह ने दो शिकायतकर्ताओं के तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत आवेदन पर आदेश सुनाने के लिए 19 फरवरी की तारीख निर्धारित की।

शिकायतकर्ताओं ने दावा किया था कि हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख गिलानी ने कई मौकों पर नफरत फैलाने वाले भाषण देकर ‘‘भारत सरकार और इसके लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाला ।’’जिरह के दौरान दोनों शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देना अदालत के अधिकारक्षेत्र में आता है क्योंकि गिलानी और तीन अन्य के कथित बयानों को दिल्ली में भी सुना गया है।

जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे और वहां लागू रणबीर दंड संहिता की प्रासंगिकता के मुद्दे पर वकील ने तर्क दिया कि ये चारों लोग भारतीय हैं, और इसलिए भारतीय दंड संहिता तथा अन्य कानूनों के प्रावधान उन पर लागू होते हैं। इसके पूर्व अदालत ने दोनों शिकायतकर्ताओं से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा था कि मामले में भारतीय दंड संहिता के प्रावधान किस तरह लागू हो सकते हैं क्योंकि गिलानी और अन्य तीन द्वारा कथित अपराध जम्मू कश्मीर में किया गया।

अदालत का आदेश दिल्ली पुलिस की कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) का अध्ययन करने के बाद आया । एटीआर में दिल्ली पुलिस ने कहा कि कथित अपराध उसके अधिकारक्षेत्र में नहीं आता और भादंसं के तहत जांच नहीं की जा सकती क्योंकि यह जम्मू कश्मीर में लागू नहीं है जहां दंड प्रावधान रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) के तहत है।
 
शिकायत में गिलानी के अतिरिक्त तहरीक ए हुर्रियत के महासचिव अशरफ साहरई और हुर्रियत कान्फ्रेंस के दो सदस्यों मसारत आलम भट तथा गुलाम नबी सुमजी के खिलाफ भी धारा 121 (देश के खिलाफ युद्ध छेडऩे या युद्ध छेडऩे की कोशिश करने) और धारा 153 ए (वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने) सहित भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।


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