निचली अदालतों में लंबित हैं 2 करोड़ से अधिक मामले

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Sunday, February 09, 2014-2:22 PM

नई दिल्ली: देश की निचली अदालतों में दो करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं । इसके साथ ही  इन्हें 3000 से अधिक न्यायिक कर्मियों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। यह टिप्पणी निचली अदालतों में आधारभूत संरचना का विकास और सशक्तिकरण पर ताजा रिपोर्ट में की गई है।

यह बातें संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में सामने आई है।  यही नहीं संसदीय समिति ने देश की निचली अदालतों में लंबित मामलों की अधिक संख्या को गंभीर विषय करार दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक न्याय विभाग (विधि मंत्रालय) ने सूचित किया है कि 31 मार्च (पिछले वर्ष ) तक निचली अदालतों में 2,68,51,766 मामले लंबित थे।

वहीं विधि एवं कार्मिक मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति का कहना है कि निचली अदालतों में काफी संख्या में मामलों के लंबित रहने में आबादी के हिसाब से न्यायाधीशों की संख्या कम होना, प्रक्रिया एवं वकीलों के हितों के मद्देनजर वाद का खर्चीला होना, खराब आधारभूत संरचना, न्यायिक कर्मियों की कमी और कमजोर वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र जैसे कारण शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 मार्च 2012 तक विभिन्न राज्यों में न्यायिक कर्मियों के 3272 पद रिक्त थे। वहीं मणिपुर और अंडमान निकोबार द्वीप को छोड़कर सभी राज्यों में लंबित मामलों की संख्या अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति यह महसूस करती है कि निचली अदालतों में न्यायिक कर्मियों और सहयोगी कर्मचारियों की भर्ती और प्रशिक्षण से लंबित मामलों में कमी लाने में मदद मिल सकती हैै। साथ ही निचली अदालतों में अधिक संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जानी चाहिए।
 

 


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