जदयू नेतृत्व से नाराज नेता तलाश रहे ‘खेवनहार’

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Sunday, February 09, 2014-2:01 PM

पटना: पटना में कड़ाके की ठंड के बाद तापमान जैसे धीरे-धीरे बढऩे लगा है, उसी तरह राजनीतिक पारा भी चढऩे लगा है। सत्तारूढ़ जनता दल-युनाइटेड (जदयू) के नेता लोकसभा चुनाव से पहले ही अपनी नैय्या की पतवार नए खेवनहार के हाथ में थमा कर निश्चिंत हो जाना चाहते हैं। यही वजह है कि जदयू के कई नेता अब नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। बिहार के पूर्व मंत्री और अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाली परवीन अमानुल्लाह ने न केवल जदयू छोड़कर आम आदमी पार्टी (आप) का दामन थाम लिया, बल्कि उन्होंने व्यवस्था पर ही सवाल उठाकर नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मुख्यमंत्री नीतीश बिहार में बदलाव और भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात करते थे, लेकिन इस्तीफा देने के बाद परवीन ने यहां तक कह दिया कि वे जो जनहित के कार्य करना चाहती थीं, उन्हें नहीं करने दिया गया। परवीन ने कहा कि सरकार में कार्य-प्रणाली और पारदर्शिता का अभाव है। इधर, जदयू के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी भी नीतीश को अहंकारी बताते हुए जमकर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने पार्टी के बिहार इकाई के अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के पत्र लिखकर कहा है कि नीतीश अहंकारी हो गए हैं और उनकी मर्जी के खिलाफ  पार्टी में कुछ नहीं होता।

उन्होंने अपने पत्र में यहां तक कह दिया कि नीतीश ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने से उन्हें रोका था। उन्हें अपने पत्र में यह खुलासा भी किया था कि उनके कारण ही निवर्तमान राज्यसभा सदस्य एन$ के$ सिंह और साबिर अली को उम्मीदवार नहीं बनाया गया। पार्टी ने हालांकि तीनों नेताओं को लोकसभा चुनाव लडऩे की पेशकश की है। इसमें तिवारी और सिंह ने पार्टी के इस पेशकश को ठुकरा दिया है।

इधर, जदयू से नाराज चल रहे सांसद मंगनी लाल मंडल भी पार्टी के खिलाफ  बगावती तेवर अपनाकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद का गुणगान कर रहे हैं। लालू को सही अर्थ में गरीबों का मसीहा बताते हुए वर्तमान सरकार की आलोचना करने से भी नहीं चूक रहे हैं। राजनीति के जानकार कहते हैं कि मंडल आगामी चुनाव में जदयू का ‘तीर’ वापस कर राजद का ‘लालटेन’ थाम लें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। इसी तरह गोपालगंज के सांसद पूर्णमासी राम भी जदयू से नाराज बताए जा रहे हैं। हाल के दिनों में ही पूर्णमासी ने अपने बगावती तेवर दिखाते हुए नीतीश के खिलाफ  कई बार बयान दे चुके हैं। इन्होंने भी राजद के लालू पर अपनी आस्था व्यक्त कर अपनी स्थिति स्पाष्ट कर चुके हैं।

इसके अलावा कई ऐसे नेता भी हैं जो इन दिनों पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। कहा जाता है कि ये नेता सही समय और सही खेवनहार की तलाश में हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि चुनाव के पूर्व यह स्थिति कोई नई नहीं है। पटना के वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह कहते हैं कि जदयू के लिए परेशानी यह है कि राज्य में बहुमत के लिए उन्हें कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों का सहारा मिला हुआ है, जिसको बनाए रखना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सभी दलों में नाराज लोग पाला बदलते हैं।


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