मनरेगा घोटाले में सर्वोच्च न्यायालय जाएगी उप्र सरकार!

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Sunday, February 09, 2014-6:37 PM

लखनऊ: मनरेगा घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की सुस्ती घोटालेबाजों के लिए राहत का सबब बन सकती है। इसी के साथ घोटाले की सीबीआई से जांच कराये जाने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने की तैयारी में है। इस संबंध न्याय विभाग ने इस बाबत औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। उम्मीद है कि सोमवार को प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय में इस आदेश के विरोध में याचिका दाखिल कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में प्रदेश सरकार के कई आईएएस व पीसीएस अधिकारी आ रहे हैं जिसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाने का फैसला लिया है। उच्च न्यायालय द्वारा सूबे के सात जिलों में हुए मनरेगा घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिये आठ दिन हो चुके हैं। इस दौरान सीबीआई अधिकारियों ने तमाम विभागों से योजना से संबंधित दस्तावेज तो बटोरे लेकिन वे एफआईआर नहीं दर्ज कर सके। उच्च न्यायालय के आदेश व तमाम सुबूतों के बावजूद सीबीआई द्वारा इस मामले में देरी किये जाने को लेकर कई कयास लगाये जा रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि सीबीआई उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने को मजबूर जरूर है लेकिन एफआईआर में देरी कर वह प्रदेश सरकार को सर्वोच्च न्यायालय जाने का मौका देना चाहती है, ताकि यह मामला कुछ दिनों के लिए टल जाए। मनरेगा जैसे बड़े घोटाले की जांच के लिए सीबीआई के पास संसाधनों की कमी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।

दूसरी ओर मनरेगा घोटाले में पंचम तल में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी के अलावा प्रदेश के कई आईएएस व पीसीएस अफसरों का फंसना तय माना जा रहा है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी कि इस मामले की जांच राज्य की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू से ही करायी जाए। फिलहाल, सूबे के न्याय विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती देने की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं और सोमवार तक वह इसे अमलीजामा पहना सकती है।
 


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