हिंसा की शिकार महिला को व्यवस्था से नहीं मिलता सहयोग

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Sunday, February 09, 2014-7:08 PM
नई दिल्ली : कनाडा में रह रहे भारतीय मूल के एक प़त्रकार का दावा है कि भारत में हिंसा की शिकार महिलाओं को कानून लागू करने वाली एजेंसियों से सहयोग मिलना तो दूर की बात है, उल्टे उन्हें उपेक्षापूर्ण प्रतिक्रिया मिलती है।  
 
कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए जैन ने कहा कि कनाडा में आये दिन महिलाएं अपने करीबी साझीदार के हाथों मौत की शिकार होती है।
 उन्होंने कहा की वर्ष 2009 में 67 महिलाओं की हत्या या तो वर्तमान अथवा पूर्व पति या उसके पुरूष मित्र ने की।
   
उन्होंने कहा ‘‘दुखद बात यह है कि भारत जैसे देश में पुलिस कथित तौर पर भ्रष्ट है। पुरूषों :पिता, भाई, पति, पुरूष मित्र और पड़ोसी: के खिलाफ महिलाओं की शिकायत को पुलिस आसानी से नहीं लेती। वह उन पर हंसती है और बिना वजह उनसे थाने के चक्कर लगवाती है।’’
 
जैन के अनुसार, इसीलिए लोगों में यह धारणा बन गई है कि उनकी :महिलाओं की: शिकायत को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती इसलिए वह शिकायत दर्ज कराने के लिए वह थाने नहीं जातीं।
 
अजित जैन की किताब ‘‘वॉयलेन्स अगेन्स्ट वूमन ऑल परवेडिंग’’ में इस मुद्दे पर शीर्ष शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं के विचार दिए गए हैं। यह किताब टोरंटो के ‘‘एल्स्पेथ हेवर्द सेंटर फॉर वूमन’’ ने पेश की है।हिंसक घटनाओं की पीड़ितों को समर्पित यह किताब नयी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद टोरंटो में हुई एक गोष्ठी के पश्चात तैयार की गई है। 
 
लेखक का कहना है कि अगर कोई महिला हिंसा की शिकार होती है तो उसका साथ देने के लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए जो उसकी मदद करे और उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित करे।
 
लेखक ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वैश्विक स्तर पर व्याप्त खतरा बताया है। किताब में जैन के अलावा टोरंटो पुलिस सेवा बोर्ड के अध्यक्ष आलोक मुखर्जी, ‘एल्प्सपेथ हेवुड सेंटर फॉर वीमेन’ के महानिदेशक सुंदर सिंह, पत्रकार एस निहाल सिंह और रामी छाबड़ा, तथा टोरंटो के सेंट माइकल्स हॉस्पिटल में स्थित ‘सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च’’ सहित अन्य लोगों के विचार भी हैं।
 
जैन के अनुसार, भारत में ग्रामीण, शहरी इलाकों, मझोले शहरों में, शिक्षित और कम शिक्षित परिवारों में महिलाओं को पुरूषों से कमतर माना जाता है।
 

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