पंजाबी बहुल सीट पर भाजपा के पास नहीं है मजबूत उम्मीदवार

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Sunday, February 09, 2014-11:36 PM

नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी): पश्चिम दिल्ली सीट पर भाजपा में टिकट की लड़ाई में अभी तक कोई मजबूत उम्मीदवार उभरकर सामने नहीं आ रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू व किरन बेदी के इनकार के बाद पार्टी ऊहापोह की स्थिति में किसे उम्मीदवार बनाया जाए। उपर से अकाली दल ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी लड़ाने के लिए पार्टी पर अलग से दबाव बना रखा है।

पंजाबी बाहुल्य इस सीट पर पार्टी किसी पंजाबी को लड़ाने के मूड में है। वैसे पिछली बार जगदीश मुखी को इस सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों से पार्टी अपनी जीत को लेकर उत्साहित है। 

पश्चिम दिल्ली सीट पर विधानसभा चुनाव में कुल 12,68, 802 वोट पड़े थे। इनमें से भाजपा को 4,59, 487 लेकर छह सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। कुल 3,890,99 वोटों के साथ आप पार्टी ने चार सीटें जीती और लोकसभा के हिसाब से वह दूसरे नंबर पर है। कांग्रेस ने यहां 2,87,517 वोट मिले थे बसपा मात्र 22,620 वोटों पर ही सीमित रह गई।
 
पिछले लोकसभा चुनाव में जीतने वाले कांग्रेस विधानसभा में अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पिछले चुनाव में महाबल मिश्रा ने 47,98,99 वोट लिए थे तो जगदीश मुखी को 3,50,889 वोट मिले थे। कांग्रेस ने यह सीट 1,29010 वोटों के अंतर से जीत ली थी। 
 
भाजपा से इस सीट पर पार्षद आशीष सूद व रजनी अब्बी टिकट मांग रहे है। रजनी 2013 के विधानसभा चुनाव में हार चुकी है। ये दोनों पंजाबी समुदाय से होने की वजह से दावा कर रहे हैं।
 
वैसे दिल्ली भाजपा में पंजाबी नेता का अभाव है। पहले पंजाबी नेता के रुप में मदनलाल खुराना का नाम सबसे आगे था। उनके बाद विजय कुमार मल्होत्रा व जगदीश मुखी पंजाबी समुदाय के बीच अपनी गहरी पैठ नहीं बना पाए। मल्होत्रा अपने बेटे को विधानसभा चुनाव तक नहीं 
जिता पाए। इस चुनाव में दो सिख विधायक आरपी सिंह राजेन्द्र नगर व शाहदरा से जितेन्द्र सिंह शंटी ही चुनाव जीते है। 

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