एल.जी. दफ्तर से लीक हो रही हैं सूचनाएं

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Monday, February 10, 2014-12:39 AM
नई  दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जन लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर भले ही उप राज्यपाल नजीब जंग से मतभेद रखते प्रतीत होते हों लेकिन उनकी प्रशंसा करते समय वह भावुक हो गए और कहा कि आप नेताओं को अपनी नाराजगी के बावजूद अपनी भाषा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
 
केजरीवाल ने कहा कि जंग के साथ उनके संबंधों में कोई ‘दरार’ नहीं है। उन्होंने उनके साथ ‘अच्छे समीकरण’ जारी रहने की उम्मीद जताई तथा कहा कि उप राज्यपाल एक नेक व्यक्ति हैं। अलबत्ता उन्होंने शक जाहिर किया है कि एल.जी. के कार्यालय से सूचनाएं लीक हो रही हैं। 
केजरीवाल की ये टिप्पणियां उनके द्वारा जंग को कड़े शब्दों में भेजे गए पत्र के 2 दिन बाद आई हैं। पत्र में उन्होंने जंग से कहा था कि वह संविधान की रक्षा करें, न कि कांग्रेस और गृह मंत्रालय के हितों की।
 
उन्होंने कहा था कि वे उनकी सरकार के जन लोकपाल विधेयक को रुकवाना चाहते हैं। पत्र इन खबरों के एक दिन बाद आया कि उप राज्यपाल ने दिल्ली सरकार के जनलोकपाल विधेयक पर सॉलिसिटर जनरल मोहन पारासरन की राय मांगी थी। आप नेता आशुतोष द्वारा जंग को ‘कांग्रेस एजैंट’ बताए जाने के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने इसे खारिज किया और कहा कि पार्टी नेताओं को अपने शब्दों के बारे में सतर्क रहना चाहिए। 
 
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि हमें अपने शब्दों के बारे में सतर्क रहना चाहिए। हमारे कुछ पार्टी नेताओं के मन में नाराजगी हो सकती है लेकिन हमारी नाराजगी की चाहे जो भी तीव्रता हो, हमें अपने शब्दों का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि, उन्होंने उपराज्यपाल कार्यालय से कुछ महत्वपूर्ण संचार ‘लीक’ होने पर नाराजगी जताई ।
 
केजरीवाल ने कहा, मुझे नहीं पता कि यह कौन कर रहा है। हो सकता है कि उनके (जंग) कार्यालय में कुछ लोग शरारत कर रहे हों। केजरीवाल ने लीक हुई चीजों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब दिल्ली सरकार ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश करने वाली फाइल भेजी तो एक टीवी चैनल ने यह दिखाना शुरू कर दिया कि उप राज्यपाल सिफारिश को खारिज करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यालय ने तुरंत उनके कार्यालय से संपर्क किया। उनके कार्यालय ने कहा कि उप राज्यपाल ने ऐसा कुछ नहीं लिखा है। यह मीडिया की कयासबाजी है।
 
अगले दिन जब फाइल मेरे पास आई तो उसमें वही चीजें थीं जो मीडिया कह रहा था।मुख्यमंत्री ने मुद्दे को ‘गंभीर’ करार दिया और कहा कि यह एक संवैधानिक संकट है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने कहा कि केंद्र सरकार उप राज्यपाल के जरिए राजनीति कर रही है। उसके बाद मेरे मकान का मुद्दा आया कि अरविन्द ने खुद इसके लिए कहा था।
 
यहां तक कि वहां (उप राज्यपाल कार्यालय) से पत्र तक लीक हो गया। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने अपने पत्र में कठोर भाषा का इस्तेमाल क्यों किया, केजरीवाल ने कहा, मैंने नरम रहने की कोशिश की थी पर भविष्य में मैं सतर्क रहूंगा। संदेश जाना चाहिए, लेकिन यह बहुत नम्र भाषा में जाना चाहिए।

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