विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करेगा: भारत

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Tuesday, February 11, 2014-9:55 AM

नई दिल्ली: भारत ने विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा से संचाालित होने वाले संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है। चार हजार मेगावाट की क्षमता वाला यह संयंत्र विश्व बैंक की सहायता से स्थापित किया जाएगा। लगभग तीस अरब रूपये की लागत से निर्मित होने वाला यह सौर बिजली घर चारन परमाणु रियेक्टर के बराबर होगा और इसका विस्तार करीब 90 वर्ग किलोमीटर के दायरे में होगा।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से होने वाला पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए अक्षय ऊर्जा के इस विशाल स्रोत के दोहन के लिए यह योजना बनाई गई है। इस अत्यधिक खर्चीले परियोजना के लिए भारतीय अधिकारियों ने सरकार से कहा है कि परियोजना के पहले चरण में लिए जरूरी ऋण सहायता के लिए विश्व बैंक से संपर्क करे। भारत के इस कदम से अमेंरिकी सरकार के भृकुटि तन गई है और उसने भारत के इस परियोजना के खिलाफ विश्व व्यापार संघ  में  अपना विरोध जताने की योजना बनाई है। अमेरिका का यह निर्णय भारत के सौर ऊर्जा उद्योग को सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने  फैसले के बाद सामने आया है।

उल्लेखनीय है कि सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक  सौर पैनलो के निर्माण उद्योग में अमेरिकी कंपनियो का वैश्विक दवदबा है।  भारत के इस कदम से प्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी निर्यातकों को एक जर्बदस्त झटका लगा है। भारत ने पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन के दिशा में और किसानो को सिंचाई के लिए सौर उर्जा से संचालित होने वाले मोटर पंप मुहैया कराने के लिये निवेश करने का भी निर्णय लिया है।

सौर उर्जा से बिजली उत्पादन के दिशा में भारतीय महाद्वीप अभी अमेरिका और जर्मनी के मुकाबले अत्यधिक पिछड़ा हुआ है। हलांकि विगत वर्षों में भारत ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है वर्ष 2009.10 में जहां सौर पैनलो से मात्र 17.8 मेगावाट का ऊर्जा की प्राप्ति हुई थी, वहीं वर्ष 2012.13 के दौरान भारत ने इस तकनीकक के माध्यम से  2208 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया है।

भारत के पर्यावरणीय मसलों के थिंक टैेंक सेंटंर फॉर साइंस एण्ड एंवायरनमेंट के प्रमुख चंद्र भूषण ने प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका नेचर को बताया कि भारत में हर साल उत्पाादन का बीस फीसदी हिस्से से अधिक उर्जा वितरण और प्राषेण के दौरान  तकनीकी कारणोंं में  बर्बाद  हो जाता है, जिससे राजस्व की भारी हानि होती है। भारत में सौर उर्जा उत्पादन की दिशा में असीम संभवाना है।

 


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