भाजपा भी लगायेगी ‘कांशीराम की जय’ के नारे

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Tuesday, February 11, 2014-1:52 PM

लखनऊ: लोकसभा चुनाव आते ही पार्टियां अपने वोटरों का लुभाने के लिए तरह-तरह के हथकंड़े अपनाना शुरु कर देती हैं। हमारे देश में दलितों की काफी तादाद होने के कारण लोकसभा चुनाव की हार-जीत का फैसला काफी हद तक दलित वोटरों पर निर्भर करता है। दलितों के वोटों में भागीदारी बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी की सभाओं में अब ‘कांशीराम जिंदाबाद’ के भी नारे लगाये जायेंगे। इसके साथ ही पार्टी का अनुसूचित जाति मोर्चा 15 मार्च को उनका जन्मदिन भी धूमधाम से बनाएगा।

इसके जरिए पार्टी उत्तर प्रदेश की उन सुरक्षित सीटों पर पैठ बनाएगी, जहां कभी उनका दबदबा हुआ करता था। ‘मिशन मोदी’ की कामयाबी के लिए भाजपा को पिछड़ों एवं अतिपिछड़ों के साथ-साथ दलितों के वोटों को बढ़ाने का काफी प्रयास पार्टी द्वारा किया जा रहा है। 1998 के लोकसभा चुनाव में 17 सुरक्षित सीटों में 12 सीटें जीतकर रिकार्ड बनाने में दलितों के  वोटों की संख्या काफी थी। भाजपा सफलता के इतिहास को दोहराने की कोशिश में दलितों के वोटों को किसी भी कीमत पर पाना चाहती है। हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में 79 सुरक्षित सीटों में से 70 सीटों पर जीत का परचम लहराने से उसका हौसला और भी बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक यूपी में भाजपा ने कम से कम दस प्रतिशत वोट वृद्धि का लक्ष्य तय किया है, जिसमें चार फीसद दलितों की भागीदारी तय की गई है।

इस टारगेट को पाने के लिए ही पार्टी के नेताओं का कांशीराम के प्रति मोह जागा है। सूत्रों के अनुसार जिला व क्षेत्रीय स्तर पर सम्मेलन करने के साथ टिकट वितरण में भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। यूपी की 17 सुरक्षित संसदीय सीटों में से दस पर गैर जाटव प्रत्याशी उतारे जाने की योजना है। कुछ भी हो अगर यूपी में भाजपा दलितों को अपनी तरफ आकॢषत करने में कामयाब हो जाती है तो भाजपा की जीत काफी हद तक आसान हो जायेगी।

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