कोर्ट ने स्वेच्छा से इच्छा मृत्यु के मामले पर सुनवाई पूरी की

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Tuesday, February 11, 2014-6:57 PM
नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने लाइलाज बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति द्वारा कृत्रिम चिकित्सा उपकरणों की मदद से जीवन को लंबा खींचने से इंकार कर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने के सवाल पर आज सुनवाई पूरी कर ली। न्यायालय इस मामले में अपना निर्णय बाद में सुनायेगा।
प्रधान न्यायाधीश पी सदािशवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मसले में दायर जनहित याचिका पर व्यापक बहस के बाद आज सुनवाई पूरी कर ली। 
 
      इस जनहित याचिका में अनुरोध किया गया है कि लाइलाज बीमारी से ग्रस्त रोगी को कृत्रिम चिकित्सा प्रणाली की सहायता से जिंदा रखने की अनुमति नहीं दी जाये। दूसरी ओर, केन्द्र सरकार ने इसका पुरजोर विरोध करते हुये इसे आत्महत्या करार दिया और कहा कि इसकी देश में अनुमति नहीं दी जा सकती।
 
यह जनहित याचिका गैर सरकारी संगठन कामन कॉज ने दायर की है। याचिका में दलील दी गयी है कि जब चिकित्सा विशेषज्ञ इस राय पर पहुंचते हैं कि जानलेवा बीमारी से ग्रस्ति व्यक्ति ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है जहां उसके अब बचने की कोई संभावना नहीं है तो उसे जीवन रक्षक उपकरणों की मदद लेने से इंकार करने का अधिकार दिया जाये क्योंकि यह सिर्फ उसकी वेदना को ही आगे बढ़ायेगा।
इस संगठन ने 2008 में यह याचिका दायर की थी जब शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय और कानून मंत्रालय से इस मामले में जवाब मांगा था।
 
अतिरिक्त सालिसीटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा ने इसका विरोध करते हुये कहा कि भारतीय समाज में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है क्योंकि यह कानून और चिकित्सीय मूल्यों के खिलाफ होगा।
 

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