केन्द्र दे सकता है सी.बी.आई. जांच के आदेश

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Wednesday, February 12, 2014-1:44 AM
नई दिल्ली : मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आदेश पर दिल्ली सरकार के अंतर्गत एंटी करप्शन ब्यूरो ने केंद्र सरकार के एक मंत्री (वीरप्पा मोइली), एक पूर्व मंत्री और 2 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है लेकिन कानून के जानकारों की मानें तो, यदि केंद्र सरकार चाहे, तो इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) से भी करवा सकती है। मामले की जांच केवल एक ही एजैंसी द्वारा की जाएगी। 
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार करप्शन ब्यूरो भष्ट्राचार से जुड़े किसी भी मामले की शिकायत मिलने पर मामला दर्ज कर सकती है लेकिन वह देश के किसी भी हिस्से में नहीं बल्कि दिल्ली में ही घटित हुआ हो। या भ्रष्टाचार के उस मामले की प्लानिंग दिल्ली में ही बनाई गई हो। सूत्रों के अनुसार भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में केस केंद्रीय जांच ब्यूरो या फिर दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज कराया जा सकता है।
 
 ये दोनों ही एजैंसियां भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत हैं। यदि किसी मामले में दोनों ही एजैंसियां किसी वजह से मामला दर्ज कर लेती हैं, तो अधिकृत रूप से उस मामले की जांच एक ही एजैंसी द्वारा की जाएगी। जो एजैंसी जांच करेगी, दूसरी एजैंसी स्वत: अपने यहां दर्ज मामला दूसरी एजैंसी को ट्रांसफर कर देगी। किसी भी हालात में एक ही मामले की दोनों एजैंसियां जांच नहीं कर सकतीं। यदि जांच को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो भी जाती है, तो दोनों एजैंसियां न्यायालय का दरवाजा खट खटाती हैं। 
 
फिर न्यायालय के आदेश पर ही एक एजैंसी द्वारा मामले की जांच की जाती है। सूत्रों की मानें तो ऐसा कई बार हुआ भी है और उस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने न्यायालय के आदेश को ही सर्वोपरि माना गया है। आई.पी.सी. के अनुसार दिल्ली सरकार केंद्र सरकार के किसी भी मामले में दखलअंदाजी नहीं कर सकती। केंद्र चाहे तो भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी मामले की जांच सी.बी.आई. को ट्रांसफर कर सकती है।

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