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कुलियों का दर्द बांटने आए, जख्मों का नहीं था पता

  • कुलियों का दर्द बांटने आए, जख्मों का नहीं था पता
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Wednesday, February 12, 2014-1:51 AM
नई दिल्ली, (धनंजय कुमार): कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार शाम 5 बजे नई दिल्ली स्टेशन पर कुलियों का दर्द बांटने तो बड़े जोश से पहुंचे, लेकिन उन्हें जख्म का पता ही नहीं था। 
 
यही वजह थी कि कुलियों ने जब अपनी मांगें पूरी करने की गुहार लगानी शुरू की तो राहुल ने उनसे पूछा कि पहले तो हमें यह बताइए कि आपकी मांगें क्या-क्या हैं? जबकि सुबह-सुबह कुलियों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांग पत्र के साथ इनसे मिलकर आया था। 
बड़ी बात यह भी है कि कुलियों ने जब सामान उठाने के भाड़े में बढ़ौतरी की मांग की तो राहुल उससे भी अनजान दिखे और कुलियों से पूछा कि हर स्टेशन पर सामान उठाने का भाड़ा एक जैसा है या अलग-अलग।
 
लोकसभा चुनावी वर्ष और रेल बजट से ठीक पहले राहुल गांधी की कुलियों के साथ इस चौपाल को लेकर राजनीतिक पार्टियों में चर्चा गरम है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी के साथ अजय माकन भी मौजूद थे। इसी ऊहापोह के बीच राहुल गांधी की चौपाल एक घंटे तक चली, जिसमें कुलियों ने साल में 3 बार मुफ्त यात्रा पास, चिकित्सा सुविधा तथा अपने बच्चों के लिए रेलवे में नौकरी की मांगें रखीं। 
 
कुलियों की मांगें सुनने के बाद राहुल ने कहा कि हम आपकी सारी परेशानियों पर गंभीरता से विचार करेंगे और कोशिश रहेगी कि आपकी सारी परेशानियों जल्द से जल्द दूर की जाएं। जिसमें मुफ्त चिकित्सा सुविधा सबसे प्रमुख है, जिस पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। अब संभव है कि इस बार के रेल बजट में कुलियों के लिए कोई चौंकाने वाली सौगात की घोषणा की जाए।
 
राहुल ने कुलियों से कहा कि हम यहां आपकी उन समस्याओं को दूर करने के लिए आए हैं, जिसके लिए आप वर्षों से संघर्ष करते रहे हैं क्योंकि मेरा मानना है कि जब तक पैरों की जमीन को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक सिर पर दीवार खड़ी नहीं की जा सकती है, इसलिए मेरी कोशिश है कि कपड़ा धोने वालों से लेकर टैक्सी चालक व कुली तक को उसका पूरा अधिकार मिले।
 
नई दिल्ली  स्टेशन के प्लेटाफार्म संख्या-1 की तरफ बने सैलून शैडिंग परिसर में लगे चौपाल में कुलियों ने कहा कि वर्ष 2008 के बाद से सामान उठाने के भाड़े में कोई बढ़ौतरी नहीं की गई है और न ही हमारे लिए कोई सुविधाओं की घोषणाएं की गई हैं। सामान उठाने के भाड़े में बढ़ौतरी की जाए, ताकि हम अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने का सपना साकार कर सकें। 
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