स्टाफ का टोटा, कैसे चले एंटी करप्शन ब्यूरो

  • स्टाफ का टोटा, कैसे चले एंटी करप्शन ब्यूरो
You Are HereNational
Wednesday, February 12, 2014-2:07 AM

   नई दिल्ली (अशोक शर्मा): मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भ्रष्ट्र लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली एंटी करप्शन ब्यूरो को और मजबूत किए जाने की बात तो कह रहे हैं, लेकिन ब्यूरो में अभी तक पर्याप्त संख्या में अधिकारियों की अभाव बना हुआ है। 

शायद यही वजह है कि कामनवेल्थ गेम्स के दौरान हुए स्ट्रीट लाइटिंग की खरीद में हुए कथित घोटाले की जांच का का आदेश पिछले सप्ताह होने के बाद सोमवार को दर्ज किया जा सका। केजरीवाल द्वारा मंगलवार की सुबह एक केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली, एक पूर्व मंत्री मुरली देवड़ा और दो अन्य व्यक्तियों के बीच कथित सांठगांठ कर गैस घोटाले का आरोप लगाने के बावजूद देर रात तक यह मामला दर्ज नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार ब्यूरो को अभी तक शिकायत नहीं मिली है। दस्तावेजों के मिलने के बाद ही कानूनी राय लेने के बाद आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। 

सवाल अब यह उठ रहा है कि जब दिल्ली पुलिस दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के अधीन है, तो जहां पुलिस के ही ज्यादातर अधिकारी आकर एंटी करप्शन ब्यूरो में आकर काम करते हैं, वह किसके अंतर्गत काम करते हैं। उपराज्यपाल के दिल्ली के पुलिस आयुक्त के या फिर मुख्यमंत्री के अधीन। पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने से पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है और उपराज्यपाल ही पुलिस के कामकाज की समीक्षा करते हैं। लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो उपराज्यपाल की बजाए विजिलेंस डिपार्टमेंट के मातहत काम करता है और विजिलेंस डिपार्टमेंट का कामकाज अभी तक मुख्यमंत्री ही देखते आ रहे हैं। इस प्रकार एक तरीके से एंटी करप्शन ब्यूरो मुख्यमंत्री के अधीन ही आता है। इसलिए वही इसका कामकाज देखते हैं।
 
मुख्यमंत्री केजरीवाल इसी कारण एंटी करप्शन ब्यूरो को सशक्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए पुलिस आयुक्त से ब्यूरो में खाली पड़ी जगहों पर अधिकारियों और कर्मचारियों को भेजने की लगातार बात कह रहे हैं। कुछ दिन पहले ही पुलिस के कुछ अधिकारियों का ब्यूरो में तबादला भी किया गया है, लेकिन अभी भी ब्यूरो में अधिकारियों की संख्या काफी कम बनी हुई है।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले ही दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी वी. रंगनाथन को ब्यूरो में तैनात किया गया था लेकिन वह एक सप्ताह के अवकाश पर गए हुए हैं। इसके साथ ही अर्से से खाली पड़े उपायुक्त पद पर भी नियुक्ति कर दी गई है, लेकिन हालही में सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के तीन अधिकारियों का ब्यूरो से तबादला कर दिया गया है। एक सच्चाई यह भी है कि पुलिस का हर कोई अधिकारी एंटी करप्शन ब्यूरो में जाने में रूचि नहीं ले रहा है।  

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You