‘पवार ने 1999 में सोनिया गांधी के खिलाफ विद्रोह का झंडा उठा पीठ में छुरा घोंपा’

  • ‘पवार ने 1999 में सोनिया गांधी के खिलाफ विद्रोह का झंडा उठा पीठ में छुरा घोंपा’
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Thursday, February 13, 2014-10:00 AM

नई दिल्ली: खाद्य मंत्री के वी थामस ने वर्ष 1999 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ विदेशी मूल के मुद्दे पर विद्रोह का झंडा बुलंद करने के लिए कृषि मंत्री शरद पवार को पीठ में छुरा घोंपने वाला व्यक्ति बताया है। खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पवार से मतभेद रखने वाले थामस ने अपनी पुस्तक ‘सोनिया, द बिलविड ऑफ मासेज’ में कांग्रेस कार्यसमिति की हंगामेदार बैठक के घटनाक्रम का सिलसिलेवार विवरण देते हुए मराठा क्षत्रप पर यह आरोप लगाया है।

 

एक सौ दस पृष्ठों की इस पुस्तक में थामस ने ‘बैकस्टैबिंग’ यानी ‘पीठ में छुरा घोंपना’ नामक शीर्षक से पांच पन्नों का एक अध्याय लिखा है और जिक्र किया है कि कैसे सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा पवार, पी ए संगमा और तारिक अनवर ने उठाया। तीनों ने बाद में अलग ‘राष्ट्रवादी कांग्रस पार्टी’ (राकांपा) बनाई। थामस ने लिखा है कि जब सबसे पहले संगमा ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में यह मुद्दा उठाया जब कांग्रेस अध्यक्ष भौंचक्की रह गईं। पवार ने संगमा का समर्थन किया। पुस्तक में कहा गया है, ‘‘जब संगमा ने अपना भाषण खत्म किया तब पवार ने बोलना शुरू किया।

 

उन्होंने पार्टी में एकता लाने और उसमें जान फूंकने के लिए बतौर कांग्रेस अध्यक्ष उनकी भूमिका की सराहना की। तब उन्होंने कहना शुरू किया कि पार्टी सोनिया के विदेशी मूल के प्रचार का सामना नहीं कर पाएगी। ’’ थामस ने पुस्तक में लिखा है कि सोनिया को विद्रोह की चिंगारी महसूस हुई क्योंकि उन्होंने ये शब्द पवार के मुख से सुने थे ,जिन्हें उन्होंने ही लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाया था। उन्होंने आगे लिखा है कि कांग्रेस पार्टी को उन लोगों से एक पत्र मिला, जो पार्टी को अपनी पीठ दिखा चुके थे। उन्होंने लिखा है, ‘‘सोनिया ने उसे पढऩे की भी जहमत नहीं उठाई। अर्जुन सिंह ने जवाब लिखा।

 

उन्होंने सोनिया से नाता तोडऩे वाले इन तीनों को मीर जाफर बताया। पीठ में छुरा घोंपना सोनिया के लिए बर्दाश्त से बाहर था। ’’ थामस ने लिखा है कि सीडब्ल्यूसी में जो ड्रामा हुआ, उसकी पटकथा महीनों पहले तैयार हो गई थी। उन्होंने लिखा है, ‘‘एक ही दल में रहने के बावजूद सोनिया और पवार के बीच नाममात्र सद्भाव था। सोनिया पवार से हमेशा दूरी बनाए रखती थीं। शायद उनके दिमाग में राजीव गांधी का यह कथन था कि पवार भले ही योग्य हैं लेकिन भरोसेमंद नहीं हैंं।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए पवार की यह कलाबाजी सशस्त्र बलों के प्रमुख के शत्रु कैंप में शामिल होने जैसा था।


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