'वैलेंटाइन डे' नायाब तरीके से मनाएंगे दुनियां के एक अरब लोग

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Thursday, February 13, 2014-2:31 PM

नई दिल्ली: विश्व के 200 से भी ज्यादा देशों के एक अरब लोग इस बार वैलेंटाइन डे के मौके पर महिलाओं के खिलाफ हिंसा बंद करके प्यार-मोहब्बत और शांति के पैगाम के साथ दुनिया को सबके लिए खूबसूरत बनाने का संकल्प लेकर एकसाथ उठ खडे होंगे। पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे में आमूलचूल बदलाव करके महिलाओं के प्रति हिंसा मुक्त समाज बनाने के मकसद से शुरू नारीवादी वैश्विक आंदोलन (वन बिलियन राइसिंग) ओबीआर के 14 फरवरी को तीन वर्ष पूरा होने के मौके पर आन्दोलन की दक्षिण एशिया की समन्वयक कमला भसीन ने के साथ बातचीत में कहा कि वैलेंटाइन डे का यह मतलब नहीं है कि आज तो गुलाब दिया और कल यदि गुलाब लेने से लडकी ने इन्कार कर दिया तो तेजाब डालकर उसका जीवन बर्बाद कर दिया।

बल्कि आज का दिन प्रेम का संदेश देने वाले वैलेंटाइन, मीरा और गुरूनानक जैसे सभी संतों को याद करना है और हर उम्र की महिलाओं के साथ हर तरह की हिंसा समाप्त करना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ओबीआर का मुख्य विषय महिलाओं को न्याय दिलाना है। न्याय सिर्फ अदालतों में  नहीं बल्कि परिवारों, स्कूल-कालेजों, कार्यालयों, सडकों और पूजास्थलों समेत हर जगह महिलाओं के साथ न्यायपूर्ण बर्ताव की मांग करना है। इस मौके पर हिंसा प्रभावित अफगानिस्तान, सीरिया, अप्रीका और यूरोप, अमेरिका तथा एशिया के 207देशों के हर वर्ग के 100 करोड लोग कला संगीत नृत्य और सच्ची कहानियों के जरिए अपनी चुप्पी तोडेंगे और समवेत स्वर में हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करके कहेंगे, बहुत हो चुका, बस, अब और नहीं।

उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा हिंसक पैदा नहीं होता बल्कि उसे इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षित किया जाता है। विडंबना यह है कि लडके को उन्मुक्त और लडकियोंं के साथ भेदभाव का प्रशिक्षण मां ही देती है। इसका कारण यह है कि शिक्षिका तो मां होती है लेकिन पाठ्यक्रम पितृसत्तात्मक समाज तैयार करता है। उन्होने कहा कि हारा हुआ, निराश और कुंठित पुरूष ही महिलाओं पर हिंसा करता है। इस आन्दोलन का मकसद पुरू षों को यह समझाना है कि हिंसा उनका भी विनाश कर रही।

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