इस अदालत में नहीं वकील, जिरह की जरूरत

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Thursday, February 13, 2014-2:37 PM

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के संभागीय मुख्यालय बिलासपुर में एक अदालत ऐसी भी है, जहां न तो वकील लाने की जरूरत है और न ही मामला दर्ज कराने के लिए फीस देने की। इस अदालत में होने वाले फैसले को कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी जा सकती। इसके लिए अलग कोर्ट की व्यवस्था की गई है। अद्भुत आश्चर्य किंतु सच है। सूबे के विद्युत उपभोक्ता फोरम के फैसले को लोकपाल में ही चुनौती दी जा सकती है। लोकपाल में भी मामलों की सुनवाई के लिए कुछ इसी तरह की व्यवस्था की गई है।

 

छत्तीसगढ़ शासन ने बिजली से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ता फोरम का गठन किया है। सूबे में इस तरह की केवल दो अदालतें संचालित की जा रही हैं। विद्युत वितरण कंपनी ने अगर खपत से ज्यादा बिजली का बिल भेज दिया, जरूरी औपचारिकता को पूरा करने के बाद भी मीटर नहीं लगाए या आवश्यक राशि जमा करने के बावजूद भी कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। बिल जमा करने के बाद भी बिजली कंपनी ने कनेक्शन काट दिया है आदि शिकायतों के निराकरण के लिए राज्य शासन ने विद्युत उपभोक्ता फोरम का गठन किया है।

 

प्रदेश में इस तरह की दो अदालतें बिलासपुर संभागीय मुख्यालय और राजधानी रायपुर में चल रही हैं। संभागीय मुख्यालय में गठित अदालत का कार्यक्षेत्र अविभाजित बिलासपुर संभाग है यानी बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़, अंबिकापुर व जशपुर को फोरम के नक्शे में शामिल किया गया है। बिलासपुर संभाग बिजली उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष देवाशीष नंदे ने बताया, ‘‘बिजली संबंधित समस्याओं को दूर करने व उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से राज्य शासन ने प्रदेश में दो बिजली उपभोक्ता फोरम का गठन किया है। बिलासपुर संभागीय मुख्यालय में संचालित फोरम का कार्यक्षेत्र अविभाजित बिलासपुर संभाग है।

 

इस अदालत में शिकायत करने के लिए वकील की बाध्यता नहीं है। उपभोक्ता सादे कागज में शिकायत लिखकर दे सकते हैं। इसके अलावा साधारण पोस्टकार्ड के जरिए भेजे जाने वाली शिकायतों को भी फोरम द्वारा रजिस्टर्ड किया जाता है।’’ राज्य शासन द्वारा गठित उपभोक्ता फोरम से हटकर यहां कामकाज का संचालन किया जाता है। उपभोक्ता फोरम में किसी कंपनी या अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए वकील की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा जरूरी अदालती शुल्क भी जमा करना पड़ता है। मामले की सुनवाई के दौरान जहां वकील को कोर्ट के सामने उपस्थित होकर अपने मुवक्किल के पक्ष में जिरह करनी पड़ती है, यहां ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।


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