'दंगा पीड़ितों में विश्वास पैदा नहीं कर पा रही है सरकार'

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Thursday, February 13, 2014-5:28 PM

लखनऊ: राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की उप्र ईकाई ने उप्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों में प्रदेश सरकार विश्वास पैदा नहीं कर पा रही है। इसी कारण पीड़ित घर लौटने को तैयार नहीं हैं। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने सर्वो न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखते हए कहा है कि घर वापस न जाने वाले कामगार हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कामगारों को अपने गांव व घर में ससम्मान रहने का अधिकार नहीं है।

चौहान ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह पूछा जाना कि क्या प्रदेश सरकार से लोगों का भरोसा उठ गया है, यह अपने आप में सरकार के मुंह पर तमाचा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च संस्था द्वारा इस तरह के सवाल उठाने से प्रदेश सरकार को अपने आचरण व कार्यों की समीक्षा करनी चाहिए। चौहान ने कहा, ‘‘प्रदेश सरकार ने राहत शिविरों में रहने वाले शरणार्थियों को कभी विपक्षी दलों का एजेंट बताया तो कभी भिखारी बताया यहां तक कि साजिशकर्ता होने की संज्ञा दी गई।

अब राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए उन्हें कामगार बताया है। चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार हर मोर्चे पर विफल है। सूबे में न तो कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज रह गई है और न ही सरकार प्रदेशवासियों की अपेक्षा पर खरी उतरी है। उन्होंने लखीमपुर खीरी में एक और किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना को दुभाग्र्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार का नतीजा है।
 


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