मुहब्बत का पैगाम पहुंचाएगा मप्र के गांव का गुलाब!

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Friday, February 14, 2014-11:10 AM

भोपाल: मुहब्बत के इजहार का दिन है ‘वैलेंटाइन-डे’, और इस दिन मुहब्बत के दीवानों के लिए अपनी दीवानगी को जाहिर करने में गुलाब का फूल बड़ी भूमिका निभाता है। यही कारण है कि हर प्रेमी अपने प्रियतम को लुभाने के लिए बेहतर से बेहतर गुलाब सौंपना चाहता है, ताकि वह उसका दिल जीत सके। इसी का नतीजा है कि मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में उगाए जाने वाले गुलाब की भी खासी मांग रहती है। ‘वैलेंटाइन-डे’ का दिन भले ही प्रेमियों के लिए अपने प्रेम का संदेश पहुंचाने का उत्सव हो मगर यह पर्व रायसेन के ग्रामीण इलाकों में गुलाब की खेती करने वाले किसानों के लिए भी कम खुशियां लेकर नहीं आता है, क्योंकि उनके गुलाब की मांग इन दिनों अन्य मौकों की तुलना में बढ जाती है और उन्हें अपने गुलाब के दाम कई गुना मिलने लगते हैं।

 

रायसेन जिले के चिटोडा गांव के खेतों में खिले गुलाबों केा देखकर ‘वैलेंटाइन-डे’, के उत्सव को महसूस किया जा सकता है। यह गांव देश के गुलाब के कारोबारियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां के गुलाब की दिल्ली, मुंबई, सूरत सहित अन्य बड़े शहरों में विशेष मांग रहती है। इस गांव की पहचान ही गुलाब की पैदावार के कारण देश में बन गई है। फूलों की खेती करने वाले रामकुमार सिंह बताते हैं कि उन्हें हर साल वैलेंटाइन-डे का खास तौर पर इंतजार होता है, क्योंकि यह दिन उनके लिए भी किसी उत्सव से कम नहीं है, ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन पूरे देश में गुलाब की मांग होती है।

 

रामकुमार बताते हैं कि इस क्षेत्र के किसान को ‘वैलेंटाइन-डे’ के मौके पर फूल की अच्छी कीमत मिल जाती है। यहां से व्यापारी गुलाब का गुच्छा 20 रुपये में ले जाते है जो दिल्ली में 300 रुपये में बिकता है। यहां का किसान एक एकड़ में की गई गुलाब की खेती से 10 लाख रुपये तक कमा लेता है। इसमें से अधिकतम हिस्सा ‘वैलेंटाइन-डे’ के सप्ताह का होता है। गुलाब की खेती करने वाले हरपाल सिंह का कहना है कि इस इलाके के गुलाब की मांग सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहींं देश के अन्य हिस्सों में भी है। अब तो विदेश में भी गुलाब के निर्यात के लिए लाइसेंस हासिल किए जा रहे हैं।

 

रायसेन जिले के चिटोडा गांव में लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में फूल की खेती की जा रही है। इन दिनों आलम यह है कि यह खेत पूरी तरह कई किस्म के गुलाबों से पटे पड़े हैं और हर तरफ  सिर्फ गुलाब ही नजर आता है।  राज्य का उद्यानिकी विभाग द्वारा फूल व सब्जी की खेती करने वाले किसानों को तकनीकी शिक्षा देने के साथ 50 प्रतिशत तक सब्सिडी की सहायता दी जाती है। इसमें अधिकतम हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होती है। इस खेती के लिए पॉली हाउस बनाने पर 40 लाख रुपये प्रति एकड़ का खर्च आता है। पॉली हाउस अपने तरह का एक घर होता है, जिस पर बारिश से लेकर हवा की मार नहीं पड़ती और वातावरण भी गुलाब की खेती के अनुकूल होता है। 

 

इसके लिए स्प्रिंकलर की खास मदद ली जाती है। उद्यानिकी विभाग के संचालक अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि पॉली हाउस खेती न केवल सुरक्षित है बल्कि इसकी पैदावार भी असुरक्षित तरीके से की जाने वाली खेती से कई गुना ज्यादा होती है। श्रीवास्तव का कहना है कि राज्य सरकार पॉली हाउस खेती को प्रोत्साहित कर रही है, इस खेती से जहां किसान पूरे साल पैदावार कर सकता है, वहीं उसकी आर्थिक स्थिति के लिए भी फायदेमंद है। वहीं उद्यानिकी विभाग के अपर संचालक आर एस कटारे कहते है कि जागरुकता के अभाव में किसान इस आधुनिक तकनीक को नहीं अपना पाते और लगातार वे घाटे की खेती किए जा रहे हैं, मगर सुरक्षित खेती अपनाने के लिए किए प्रयास चटोडा गांव में सफल होने लगे हैं।

 

चटोडा गांव के खेतों में उग रहा गुलाब अभी देश के अन्य हिस्सों में पहुंचकर प्रेमी और उसके प्रियतम को भरमाने का साधन बन गया है, चल रही कोशिश और किसान की मेहनत के आधार पर कहा जा सकता है कि वह दिन ज्यादा दूर नहीं है जब यहां का गुलाब विदेशों में पहुंचकर वहां के  जोड़ों को जोडऩे का काम करें।


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